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मुख्यमंत्री पुत्र सांसद, वो भी डॉक्टर, फिर भी कल्याण डोंबिवली की सरकारी आरोग्य सुविधा बदतर

(देवकी यादव)

१० लाख से अधिक आबादी वाला कल्याण डोंबिवली के नागरिकों का दुर्भाग्य कहा जाए या कुछ और, एक तरफ केंद्र कि नरेंद्र मोदी सरकार आम नागरिकों को आरोग्य संबंधी सुविधा जन जन तक पहुचे इसके लिए लगातार नए नए योजना लाकर प्रयास कर रही है। वही कल्याण डोंबिवली मे पिछले १० वर्षों मे योजनावद्ध ढंग से यहा उपलब्ध आरोग्य सुविधा खत्म करने की साजिश रची जा रही है।

साजिश : डोंबिवली का शास्त्रीनगर अस्पताल अब सिर्फ कामचलाऊ महिला प्रसूति गृह

एक समय था यानि आज से १० – १२ साल पहले,  जब यहा के कल्याण डोंबिवली मनपा के डोंबिवली पश्चिम स्थित शास्त्री नगर अस्पताल मे एक दर्जन से अधिक फिजीसीयन और सर्जन के साथ विभिन्न रोगों के विशेषज्ञ डाक्टर उपलब्ध थे। लेकिन आज इसी शास्त्रीनगर अस्पताल मे किसी भी बड़ी कसुल्टी की स्थिति मे डाक्टर तुरंत मरीज के परिजन को “स्थिति उनके बस मे नहीं है मरीज को तुरंत मुंबई के सरकारी अस्पताल मे ले जाओ” का घिसा पीटा राग सुना देते है ।

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ऐसे मे मजबूरी बस मरीज के परिजन अपने मरीज को जींदा रखने के लिए मुंबई के सरकारी अस्पतालों की तरफ रुख करते है या फिर कल्याण डोंबिवली मे कुकुरमुत्तों कि तरह १०० – २०० मीटर पर फैले निजी अस्पतालों मे जाकर शरण लेते है। और इन निजी अस्पतालों मे मरीजों से क्या व्यवहार होता होगा कैसे वसूली करते होंगे इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

किस साजिश के तहत डोंबिवली पूर्व की मनपा महिला प्रसूति गृह पिछले दस साल से बंद ?

कल्याण लोकसभा सीट से सांसद डॉक्टर श्रीकांत शिंदे है। वर्ष २०१९ के लोकसभा चुनाव के पहले उन्होंने और उनके पिता और राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कल्याण डोंबिवली के नागरिकों को अत्याधुनिक आरोग्य सुविधा सरकारी स्तर पर उपलब्ध कारवाने का दावा अपने चुनावी घोषणा पत्र मे बढ़ा चढ़ा कर किया था। लेकिन आज स्थिति जस के तस बनी हुई है।

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लगातार २०१९ मे दूसरी बार सांसद चुने जाने के बाद भी कल्याण डोंबिवली मनपा के रुक्मिणी बाई और डोंबिवली के शास्त्री नगर अस्पताल मे आवश्यकता के अनुसार डाक्टरो की नियुक्ती पर मनपा प्रशासन उदासीन है। सुविधा के नाम पर डोंबिवली के शास्त्री नगर अस्पताल मे निजी संस्थान द्वारा कॉम्पुटराइज्ड लेबोरेटरी शुरू की गई है। जिसमे विभिन्न ब्लड जांच, X-REY, ECG, सिटी स्कैन, जैसी सुविधा किफायती शुल्क मे दी जाती है।

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लेकिन पहले यही सुविधा मनपा कर्मियों, वरिष्ठ नागरिक और अस्पताल मे ऐड्मिट मरीजों को मुफ़्त मे उपलब्ध थी। अब इन लोगों से भी विभिन्न जांच के लिए शुल्क वसूला जाने लगा है। इसके साथ यहा के लबोरेटरी की जांच रिपोर्ट पर बाहर के निजी अस्पताल भी प्रश्न चिन्ह लगाते है। अगर निजी अस्पताल मे इलाज करवा रहे मरीज किफायत की सोंच कर मनपा के इस जांच केंद्र से संबंधित जांच करवाते है तो निजी अस्पताल वाले डॉक्टर इसकी वैधता पर सवाल उठा देते है।

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कल्याण लोकसभा क्षेत्र के सांसद डॉक्टर श्रीकांत शिंदे ने वर्ष २०१९ मे हि, शायद सांसद बनते ही लोकसभा मे “अस्पतालों मे मरीज के परिजनों द्वारा अस्पताल के डाक्टरों से मारपीट तोडफोड के विरुद्ध सख्त कानून बनाने का बिल” अपने नाम से डाल रखा है। जो केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा प्रलंबित रखा गया है।

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निजी अस्पतालों के डाक्टरों को सुरक्षा मिलनी चाहिए इसमे कोई विवाद का प्रश्न ही नहीं उठता, लेकिन कल्याण डोंबिवली मनपा अस्पतालों मे आवश्यक डाक्टरों की संख्या आवश्यकता अनुसार हो, यहा के अस्पतालों मे इतनी सुविधा तो कम से कम हो कि मरीजों को छोटी छोटी समस्या के लिए अन्य अस्पताल मे भागने नौबत नहीं आए। जिसमे प्रमुख रूप से डोंबिवली के शास्त्री नगर अस्पताल मे ICU वार्ड की सुविधा अत्यंत जरूरी है। अस्पताल मे सिर्फ आक्सिजन सिलेंडर कि उपलब्धता तो महज खानापूर्ति है ।

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