रेल यात्रियों की शिकायतों को दबाने के लिए ही सक्रिय है रेल मंत्रालय का टि्वटर हैंडल @RailwaySeva

एक समय था जब नरेंद्र मोदी की सरकार केंद्र में नए-नए सत्ता में आई थी और मोदी सरकार में पहले रेल मंत्री के रूप में महाराष्ट्र से शिवसेना सांसद सुरेश प्रभु को रेलवे मंत्रालय का चार्ज दिया गया था

और रेल मंत्री का पदभार संभालते ही सुरेश प्रभु ने रेलवे में अनेकों सुधार कार्य करने के साथ देश भर के रेलवे यात्रियों की शिकायत पलक झपकते ही दूर करने के लिए अनेक नए नियम बनाए थे।

इससे रेलवे यात्रियों को अपने यात्रा के दौरान होने वाली परेशानियों से निजात मिलने लगा था। कुछ ऐसी ही रफ्तार सुरेश प्रभु के बाद रेल मंत्री बने पीयूष गोयल ने भी कायम रखी थी।

लेकिन जुलाई 2021 में मोदी सरकार के कैबिनेट विस्तार में नए रेल मंत्री के रूप में अश्विनी वैष्णव ने कार्यभार संभाला है पेशे से भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे वैष्णव को रेल अधिकारी ही दबे जुबान से हाई प्रोफाइल वाले रेलवे मंत्री के रूप में मानते हैं।

सुरेश प्रभु के रेल मंत्री रहने के दौरान ही ट्विटर पर यात्रियों को सीधे रेल मंत्रालय को अपनी रेल यात्रा संबंधी शिकायतों को करने का प्रावधान किया था।

और उस दौरान ऊपर से नीचे यानी रेल मंत्रालय से लेकर स्थानीय रेलवे स्टेशन के अधिकारी तक पूरे नियम से यात्रियों की शिकायत दूर करने में एड़ी चोटी लगा देते थे

लेकिन वैष्णव के रेलवे मंत्री बनते ही उन्होंने रेल मंत्रालय के तरफ से रेलवे सेवा टि्वटर हैंडल को यात्रियों की शिकायत दूर करने के लिए अधिकृत कर दिया। रेलवे सेवा का यह टि्वटर हैंड वर्ष २०१७ से शुरू था लेकिन इसे वैष्णव ने एक्टिव किया है

और देशभर से किसी भी यात्री द्वारा शिकायत किए जाने पर थोड़ी ही देर के बाद रेलवे सेवा टि्वटर हैंडल के तरफ से पहले यात्री का पीएनआर और मोबाइल नंबर मांगा जाता है और जल्दी ही शिकायत दूर करने की का आश्वासन दिया जाता है।

यात्रियों से अपनी यात्रा का विवरण मिलने के बाद रेल सेवा ट्वीटर हैंडल का यहीं से असली चेहरा नजर आने लगता है।

रेल सेवा से संबंधित रेल अधिकारियों द्वारा संबंधित ट्रेन के सुपरवाइजर या फिर आईआरसीटीसी के पैंट्री मैनेजर को संबंधित शिकायत के बारे में जानकारी देता है और उसे यथाशीघ्र सेटलमेंट करने की विनती करता है।

विनंती शब्द का प्रयोग यहां इसलिए किया गया है क्योंकि रेलवे सेवा द्वारा एक बार संबंधित ट्रेन के अधिकारी को शिकायत के बारे में सूचना देने के बाद फिर उस रेल यात्री की कोई बात नहीं सुनता है चाहे उस यात्री की शिकायत नहीं हल हो या फिर संबंधित ट्रेन के अधिकारियों द्वारा आकर उस यात्री से दुर्व्यवहार किया गया हो।

एक बार रेलवे सेवा टि्वटर हैंडल के अधिकारियों द्वारा संबंधित ट्रेन के अधिकारियों को इसकी सूचना देने के बाद उक्त ट्रेन के यात्रियों की शिकायत हल नहीं होने संबंधित ट्वीट पर जवाब देना रेल सेवा ट्वीटर हैंडल जरूरी नहीं समझता है।

रेलवे यात्री की शिकायत पर जब संबंधित ट्रेन के अधिकारी शिकायतकर्ता यात्री के पास पहुंचते हैं तो पहले तो यात्री को हाथ पैर जोड़कर मनाने का प्रयास करते हैं। और घंटा दो घंटा बिता कर फिर उस यात्री को उसी के हाल पर छोड़ कर चले जाते हैं।

और शिकायतकर्ता यात्री कि ना तो शिकायत हल होती है नाही रेलवे मंत्रालय द्वारा कोई उचित कार्रवाई का ही आश्वासन मिलता है।

ताजा मामला तमिलनाडु एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे हैं राघवेंद्र सिंह का है आईआरसीटीसी के मेनू चार्ट में शाकाहारी खाने का मूल्य ₹80 मात्र है और यहां पैंटरी कार के सदस्यों ने उनसे ₹120 प्रति प्लेट ना सिर्फ चार्ज किया बल्कि उन्हें जीएसटी वाला बिल भी दिया है।

रेलवे सेवा टि्वटर हैंडल के संबंधित अधिकारी ना तो अनपढ़ गवार है नाही अंधे है उन्हें दिख रहा है की आईआरसीटीसी के संबंधित कांट्रेक्टर के किसी सदस्य ने यात्री राघवेंद्र से ₹40 प्रति पेठ ओवरचार्ज लिया है।

 

लेकिन अभी भी उनकी तरफ से टालमटोल ही चल रहा है और इस पर किसी भी तरह का कार्रवाई संबंधित आईआरसीटीसी के कांट्रेक्टर या उसके किसी सदस्य पर नहीं होने की पूरी गारंटी है।

यात्रियों से ओवर चार्ज की शिकायत तो अब आम हो गई है। और इसके पुख्ता सबूत रेलयत्री अपनी शिकायत के साथ ही  रेलवे सेवा के ट्विटर हैंडल पर सार्वजनिक रूप से देते हैं।

लेकिन इस बारे में रेलवे सेवा टि्वटर हैंडल द्वारा कभी किसी आईआरसीटीसी के कांट्रेक्टर पर कोई कार्रवाई की होगी ऐसा असंभव ही लगता है।

 

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