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चमकती ट्रेनें, लचर व्यवस्था: रेलवे और IRCTC के ‘सिंडिकेट’ से ठगे जा रहे रेल यात्री; ₹20 में बाजार में 400ml, तो स्टेशन पर आधी?

विशेष रिपोर्ट। एक तरफ जहां केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण, वंदे भारत जैसी हाई-स्पीड ट्रेनों और स्टेशनों के कायाकल्प के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर रेलवे की सहयोगी संस्था IRCTC और रेल प्रशासन की भ्रष्ट कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि सेवा और प्रबंधन के नाम पर यात्रियों से खुलेआम ‘वैध ठगी’ दिखाकर अवैध वसूली का खेल चल रहा है।

खानपान के नाम पर समझौता, मुनाफे पर जोर

IRCTC के पास भारतीय रेल में टिकट बुकिंग के साथ-साथ स्टेशनों और चलती ट्रेनों में खानपान (Catering) के प्रबंधन की सीधी जिम्मेदारी है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यात्रियों को गुणवत्ताहीन खाना परोसे जाने और तय दरों से अधिक वसूली (Overcharging) की शिकायतें अब आम बात हो चुकी हैं।

सबसे बड़ा आरोप यह है कि स्टेशनों पर यात्रियों की सहूलियत से ज्यादा वेंडरों और IRCTC के मुनाफे का ध्यान रखा जाता है। स्टेशन और ट्रेनों में वही ब्रांड्स और सामान उपलब्ध कराए जाते हैं जिनमें कमीशन और मार्जिन अधिक होता है।

छोटे पैकेट गायब: चिप्स से लेकर शीतल पेय तक की कलाबाजारी

बाजार में 5 और 10 रुपये वाले चिप्स व स्नैक्स के पैकेट हर छोटी-बड़ी दुकान पर आसानी से मिल जाते हैं। लेकिन रेलवे स्टेशनों या ट्रेनों में 20 रुपये से कम का कोई पैकेट खोजना मुमकिन नहीं है। छोटे बजट वाले यात्रियों के पास महंगा सामान खरीदने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं बचता।

कल्याण स्टेशन का ताजा मामला: 20 रुपये में 400ml नहीं, सिर्फ 250ml!

प्रशासनिक लापरवाही और वेंडरों की मनमानी का ताजा उदाहरण महाराष्ट्र के कल्याण रेलवे स्टेशन पर देखने को मिला।

सामान्य खुले बाजार में 400 ML पेप्सी की बोतल ₹20 में उपलब्ध है।

वही कल्याण रेलवे स्टेशन पर ₹20 में मात्र 250 ML की पेप्सी बेची जा रही है।

यानी स्टेशन के भीतर कदम रखते ही आम उपभोक्ता को उसी कीमत में लगभग आधी मात्रा से संतोष करना पड़ रहा है।

आम यात्रियों में आक्रोश

रेलवे के इस दोहरे रवैये और IRCTC प्रबंधन की खामोशी से आम यात्रियों में भारी रोष है। यात्रियों का कहना है कि जब तक रेलवे के भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों के इस गठजोड़ पर नकेल नहीं कसी जाएगी, तब तक ‘विश्वस्तरीय रेलवे’ का सपना कागजों और विज्ञापनों तक ही सीमित रहेगा।