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वसई-विरार मनपा में स्मार्ट मीटर के खिलाफ प्रस्ताव पास करने की मांग, कांग्रेस ने की महापौर से अपील

विरार:

वसई-विरार शहर में स्मार्ट बिजली मीटरों को लेकर नागरिकों में भारी असंतोष फैल रहा है। बिजली बिलों में अचानक हुई भारी वृद्धि और अनियमित बिजली आपूर्ति के कारण लोग परेशान हैं। इस स्थिति को देखते हुए कांग्रेस पार्टी ने वसई-विरार शहर महानगरपालिका (VVMC) के महापौर से मांग की है कि नगर निगम में स्मार्ट मीटर के खिलाफ एक आधिकारिक प्रस्ताव पारित किया जाए।

10 लाख नागरिक प्रभावित

वसई-विरार शहर के लगभग 10 लाख नागरिकों को महावितरण (MSEDCL) द्वारा बिजली की आपूर्ति की जाती है। इसमें घरेलू (निजी) और औद्योगिक, दोनों प्रकार के कनेक्शन शामिल हैं।

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जनता की मुख्य समस्याएं:

बिलों में बढ़ोतरी: स्मार्ट मीटर लगने के बाद से बिजली बिलों में अप्रत्याशित और भारी वृद्धि हुई है।

अधूरी व्यवस्था: बार-बार बिजली कटने और ट्रांसफॉर्मर (रोहित्र) फटने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।

बीजेपी को छोड़कर सभी दल एक साथ, सर्वदलीय मोर्चे की तैयारी

एक तरफ महावितरण दावा कर रहा है कि पिछले डेढ़ साल में 5 लाख उपभोक्ताओं के 11 करोड़ रुपये की बचत हुई है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर नागरिक भारी बिलों से त्रस्त हैं। स्मार्ट मीटर के विरोध में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को छोड़कर अन्य सभी राजनीतिक दल और संगठन एक मंच पर आ रहे हैं।

बहुजन विकास आघाड़ी, कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट), महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और शहर के विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मिलकर इस योजना के खिलाफ व्यापक ‘सर्वदलीय मोर्चा’ निकालने का ऐलान किया है।