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स्वास्थ्य सेवा को डिजिटल बूस्ट, महाराष्ट्र की स्वास्थ्य व्यवस्था होगी और ज्यादा स्मार्ट और पारदर्शी

मुंबई, 03 सितंबर 2026 –

महाराष्ट्र की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा तकनीकी बदलाव होने जा रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज वर्षा आवास, मुंबई में सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के तीन बड़े और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स को लॉन्च किया।

इनमें 1. एकीकृत स्वास्थ्य डैशबोर्ड, 2. एकीकृत स्वास्थ्य सुविधा केंद्र और 3. सरकारी अस्पतालों के लिए स्टार रेटिंग सिस्टम शामिल हैं।

इस मौके पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, “राज्य में स्वास्थ्य से जुड़े डेटा का सिर्फ संकलन नहीं, बल्कि जनहित में उसका असरदार इस्तेमाल होना चाहिए। नागरिकों को ज्यादा बेहतर और आसान स्वास्थ्य सेवा मिले, इसके लिए इन तीनों योजनाओं को जमीन पर पूरी गंभीरता से लागू किया जाए।” उन्होंने विभाग के इन तकनीक-आधारित प्रयासों की सराहना भी की।

40 से ज्यादा पोर्टल अब एक ही जगह, फैसले होंगे डेटा के आधार पर

अभी तक सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के 40 से ज्यादा अलग-अलग पोर्टल चल रहे थे। हर योजना की जानकारी अलग-अलग जगह होने से फैसले लेने में देरी होती थी। इसी दिक्कत को खत्म करने के लिए एकीकृत स्वास्थ्य डैशबोर्ड बनाया गया है।

इस एक ही डैशबोर्ड पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीबी नियंत्रण, गैर-संचारी रोगों की जांच जैसे सभी बड़े कार्यक्रमों के अहम आंकड़े दिखाई देंगे। राज्य और जिला-वार परफॉर्मेंस का लाइव विश्लेषण किया जा सकेगा।

इसका सीधा फायदा ये होगा कि किस जिले में किस बीमारी के मामले बढ़ रहे हैं, ये तुरंत पता चल जाएगा और वहां तुरंत जरूरी कदम उठाए जा सकेंगे। अब स्वास्थ्य डेटा सिर्फ फाइलों में नहीं रहेगा, बल्कि सीधे एक्शन में बदलेगा।

104 कॉल सेंटर अब और स्मार्ट, सीधे जनता से होगा संवाद

दूसरा बड़ा प्रोजेक्ट है **एकीकृत स्वास्थ्य सुविधा केंद्र**। इसमें 104 कॉल सेंटर को पूरी तरह से अपग्रेड और एकजुट किया गया है।

अब इस केंद्र के जरिए सिर्फ जनता के आने वाले कॉल ही नहीं, बल्कि विभाग की तरफ से मरीजों को किए जाने वाले फॉलो-अप कॉल का भी पूरा मैनेजमेंट होगा।

• हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं और डिलीवरी के बाद की माताओं का नियमित फॉलो-अप

• टीबी और अन्य गंभीर बीमारियों वाले मरीजों की निगरानी

• सरकारी अस्पताल में मिली सेवा को लेकर मरीजों से फीडबैक लेना

इस केंद्र पर रोजाना करीब एक हजार कॉल हैंडल करने की व्यवस्था है और इसके लिए प्रशिक्षित ऑपरेटर्स तैनात रहेंगे। कोई भी गंभीर मामला सामने आते ही उसकी जानकारी तुरंत संबंधित जिले के अधिकारी को भेज दी जाएगी।

अब सरकारी अस्पतालों को भी मिलेगी स्टार रेटिंग, जैसे होटलों को मिलती है।

तीसरा और सबसे क्रांतिकारी फैसला है

स्टार रेटिंग सिस्टम

अब तक होटलों को स्टार मिलते थे, अब सरकारी अस्पतालों को भी उनकी सेवा के हिसाब से स्टार दिए जाएंगे।

अस्पतालों को इन मानकों पर परखा जाएगा:

स्पेशल डॉक्टरों की उपलब्धता, स्टाफ की मौजूदगी, दवाओं का स्टॉक, लैब सेवाएं, OPD-IPD मरीजों की संख्या, प्रसव और ऑपरेशन की संख्या, साफ-सफाई और सबसे अहम – मरीजों का फीडबैक।

इस सिस्टम से आम नागरिक को घर बैठे पता चल जाएगा कि किस अस्पताल में कौन सी सुविधा उपलब्ध है। अब प्रशासन का जोर सिर्फ “सेवा दी गई या नहीं” पर नहीं, बल्कि “सेवा मरीज तक पहुंची या नहीं” पर होगा।

शिकायत मिलने पर जिला स्तर पर तुरंत कार्रवाई होगी और फिर दोबारा मरीज से संपर्क कर ये कन्फर्म किया जाएगा कि उसे सेवा मिली या नहीं।

कोल्हापुर बनेगा स्मार्ट स्वास्थ्य जिला – महा पल्स AI पायलट प्रोजेक्ट

इस डिजिटल क्रांति की शुरुआत के लिए कोल्हापुर जिले को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चुना गया है।

इसका नाम है

महा पल्स AI

कोल्हापुर जिले की 104 सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं और 12 तालुकाओं को एक ही इंटीग्रेटेड डिजिटल सिस्टम से AI के जरिए जोड़ा जाएगा। इससे संसाधनों का मैनेजमेंट, मरीजों का फॉलो-अप और सेवाओं की निगरानी और ज्यादा प्रभावी हो जाएगी।

इस लॉन्चिंग कार्यक्रम में सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर, राज्य मंत्री मेघना बोर्डीकर और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।