रेलवे विभागों की आपसी खींचतान में बलि चढ़ रही जनता: वालधूनी-रेलवे अस्पताल मार्ग पर बड़े हादसे का इंतजार कर रहा प्रशासन!
कल्याण
अनिल कुमार गर्ग
“शायद किसी बड़ी दुर्घटना और अनहोनी के बाद ही रेलवे प्रशासन की नींद खुलेगी!” यह आक्रोश उन हजारों नागरिकों, मरीजों, रेलवे कर्मचारियों और मासूम स्कूली बच्चों का है, जो रोजाना वालधूनी से मंडल रेलवे चिकित्सालय (रेलवे अस्पताल) की ओर जाने वाले गड्ढा-युक्त मार्ग से गुजरने को मजबूर हैं।
कल्याण स्थित मंडल रेलवे चिकित्सालय, रेलवे लोको शेड, रेलवे कॉलोनी और रेलवे स्कूल को जोड़ने वाला यह एकमात्र मुख्य संपर्क मार्ग आज पूरी तरह से खड्डों में तब्दील हो चुका है। एकमात्र रास्ता होने के बावजूद इस महत्वपूर्ण सड़क की हो रही अनदेखी अब लोगों की जान पर भारी पड़ रही है।
मीडिया कवरेज पर ‘मिट्टी डालो’ नीति: दिखावटी मरम्मत और लीपापोती
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब भी समाचार पत्रों या मीडिया के माध्यम से प्रशासन का ध्यान इस जर्जर सड़क की ओर आकर्षित कराया जाता है, तब रेलवे प्रशासन आनन-फानन में जागता है। हालांकि, समस्या का स्थाई समाधान निकालने के बजाय गड्ढों में कच्ची मिट्टी और मटीरियल डालकर महज ‘लीपापोती’ कर दी जाती है।
हाल ही में की गई इस कामचलाऊ मरम्मत का नतीजा यह हुआ कि बारिश के साथ ही मिट्टी और कच्चा मटीरियल बहकर सड़क के बीचों-बीच फैल गया। इससे स्थिति पहले से भी अधिक भयावह और जानलेवा हो गई है। अब वाहन चालकों के लिए गड्ढों के साथ-साथ सड़क पर फैली कीचड़ और फिसलने वाले मटीरियल से गाड़ियों का नियंत्रण खोने का दोहरा जोखिम पैदा हो गया है।
कल्याण रेलवे अस्पताल जाने वाला एकमात्र रास्ता बदहाल, हादसे के इंतजार में रेलवे प्रशासन?
अंदरूनी खींचतान: मरम्मत विभाग बनाम निर्माण विभाग
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, इस सड़क की दुर्दशा का असली कारण रेलवे के दो आंतरिक विभागों की आपसी लड़ाई है। एक तरफ इंजीनियरिंग विभाग का ‘मरम्मत विभाग’ है तो दूसरी तरफ ‘निर्माण विभाग’। दोनों ही विभाग सड़क के रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालकर अपना पलड़ा झाड़ रहे हैं।
विभागों की इस आपसी खींचतान और टालमटोल की नीति के बीच आला अधिकारी आंखों पर पट्टी बांधकर बैठे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि रेल प्रशासन किसी बड़े हादसे या अनहोनी का इंतजार कर रहा है, तब जाकर शायद कोई ठोस कार्रवाई हो।
उग्र जन-आंदोलन की चेतावनी
अस्पताल आने वाले गंभीर मरीज, चौबीसों घंटे ड्यूटी पर तैनात लोको शेड कर्मी और स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चे हर दिन इस खतरनाक रास्ते पर हादसों का शिकार होने को मजबूर हैं। रेलवे प्रशासन के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये से स्थानीय नागरिकों में भारी रोष व्याप्त है। नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि दोनों विभागों की खींचतान बंद कर तुरंत सड़क का पक्का निर्माण नहीं शुरू किया गया, तो वे रेलवे प्रशासन के खिलाफ उग्र प्रदर्शन और घेराव करेंगे।

