“मुंबई आसपास” खबर का असर: कल्याण रेलवे अस्पताल मार्ग के खड्डों पर चला जेसीबी, पर थूक पट्टी से भड़के नागरिक
कल्याण पश्चिम स्थित रेलवे अस्पताल जाने वाले रास्ते की हालत हर साल की तरह इस बरसात में भी बेहद खराब हो गई थी। हर तरफ पुरे रोड पर खड्डे ही खड्डे नजर आते थे। और बरसात के कारण पानी भर जाने से सड़कों पर खड्डे नहीं दिखते हैं। जिससे इस सड़क पर निरंतर दो पहिया वाहन चालकों के दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका व्यक्त की जा रही थी
इस समस्या की खबर “मुंबई आसपास” में लगने के बाद रेलवे प्रशासन का संबंधित विभाग सक्रिय हुआ और इस समस्या के निदान के लिए भी प्रयास करता दिखा। लेकिन इस प्रयास के बारे में आम नागरिक ही यह कह रहे हैं कि रेलवे प्रशासन का यह कार्य आम नागरिकों के लिए “थूक लगाने” वाली कवायत को चरितार्थ करता है.
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उनके अनुसार रेलवे प्रशासन को यह भली-भांति मालूम है की बरसात के कारण हर वर्ष इस सड़क पर खड्डे हो जाते हैं। इससे यहां के रेलवे अस्पताल, रेलवे आवासीय कॉलोनी, रेलवे स्कूल, रेलवे लोको शेड में कार्यरत रेल कर्मियों को नित्य समस्या का सामना करना पड़ता है।
क्योंकि इन खड्डों से नित्य यहां से गुजरने वाले दो पहिया वाहन चालक के दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका बनी रहती हैं। जबकि इस मामले में स्थानीय रेलवे प्रशासन बरसात खत्म होने का इंतजार करता रहता है। और तब तक यहां से गुजरने वाले मरीज और अन्य नागरिकों को यह गंभीर समस्या झेलना उनकी मजबूरी रहती है।
ज्ञात होकि कल्याण और इसके आसपास मतलब भिवंडी, डोंबिवली, उल्हासनगर, अमरनाथ के रेलवे कर्मी को रेलवे अस्पताल में जाने का यह एकमात्र रास्ता है। इसके साथ इसी क्षेत्र में रेलवे कॉलोनी, रेलवे स्कूल, और रेलवे का लोको शेड है।
सबसे महत्वपूर्ण बात कि यह क्षेत्र रेलवे की जगह में है और एकांत में होने के कारण इस तरफ शेयर ऑटो रिक्शा नहीं चलता है। ऐसे में यहां रहने वाले लोग, अस्पताल कर्मी और मरीज, रेलवे कॉलोनी में रहने वाले लोग, स्कूल में पढाने वाले शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं, और लोको शेड में कार्यरत रेल कर्मचारियों को या तो रिजर्व ऑटो करके यहां आना पड़ता है या फिर निजी वाहनों से इस क्षेत्र में आना जाना पड़ता है।
यह पूरा क्षेत्र रेलवे के अधीन है। यहां सड़क निर्माण से लेकर विभिन्न निर्माण और मरम्मतीकरण का कार्य रेलवे प्रशासन की देख रेख में ही होता है। इस बार भी मुंबई आसपास में इसकी खबर छापने के बाद रेलवे का संबंधित विभाग सक्रिय हुआ और जेसीबी में भरे हुए सड़क निर्माण के पदार्थ को उक्त खड्डों पर रखकर अपने जिम्मेदारी से मुक्ति पा ली।
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आम नागरिकों का कहना है कि रेलवे के निर्माण विभाग का यह मरम्मतीकरण सिर्फ थूक लगाने वाले कहावत को चरितार्थ करता है। क्योंकि सड़कों के खड्डों पर जेसीबी से रखे गए सड़क निर्माण के पदार्थ थोड़ी सी बरसात में अलग-अलग बिखर जाती है और थोड़े दिनों में ही फिर से सड़कों पर खड्डे दिखने लगते हैं
ऐसे में यहां से गुजरने वालों वाले नागरिकों की समस्या जस के तास बनी रहती है। यहां से गुजरने वाले अनेक रेलवे के रिटायर्ड कर्मियों के अनुसार रेलवे प्रशासन के संबंधित विभाग को इस समस्या पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और इसका स्थाई समाधान करने की आवश्यकता है।

