Latest

स्कूल की कैंटीन में वडापाव की जगह इडली, कोला की जगह छाछ; सेहतमंद विकल्पों के लिए एफडीए का बड़ा फैसला

मुंबई:

“सेहतमंद विकल्प हमेशा आसानी से मिलने वाला विकल्प होना चाहिए। जब स्कूल की कैंटीन में वडापाव की जगह इडली ले लेती है और कोला की जगह छाछ आ जाती है, तो यह केवल एक छोटा सा बदलाव लग सकता है। लेकिन बच्चों की आदतें तय करने वाले खान-पान के माहौल में यह एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा बदलाव है,” यह बात खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंडे ने कही है। सोशल मीडिया पर यह विचार साझा करते हुए उन्होंने स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर प्रशासन का रुख स्पष्ट किया है।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) और राज्य शिक्षा विभाग के संयुक्त आदेश के बाद मुंबई और ठाणे के स्कूलों ने अपनी कैंटीन के मेन्यू में क्रांतिकारी बदलाव करना शुरू कर दिया है। बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए वडापाव, समोसे, तले हुए व्यंजनों और वातित पेय (Aerated Drinks) पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इनकी जगह अब इडली, डोसा, पोहा, शीरा, उपमा और छाछ जैसे पौष्टिक विकल्पों को शामिल किया गया है।

‘खाद्य सुरक्षा और मानक (स्कूल के बच्चों के लिए सुरक्षित भोजन और संतुलित आहार) नियम, 2020’ को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंडे ने जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEO) और शिक्षा आयुक्त के साथ हुई बैठक में इन नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन शहर के होटलों पर कार्रवाई करेगा

प्रमुख नियम और महत्वपूर्ण बदलाव:

50 मीटर के दायरे में रोक: स्कूल परिसर के 50 मीटर के भीतर अधिक वसा, चीनी और नमक (HFSS) वाले जंक फूड बेचने पर सख्त पाबंदी लगा दी गई है। नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं पर कार्रवाई के लिए एफडीए को तुरंत सूचित करने के निर्देश प्राचार्यों को दिए गए हैं।

अभिभावकों के लिए टिफिन गाइडलाइंस: स्कूलों ने माता-पिता से भी अपील की है कि वे बच्चों के टिफिन में जंक फूड न दें, बल्कि घर का बना ताजा खाना और प्लास्टिक के बजाय स्टील के डिब्बों का उपयोग करें।

बर्थडे सेलिब्रेशन का नया ट्रेंड: आर्चडायोसेसन बोर्ड ऑफ एजुकेशन (ABE), पोदार एजुकेशन नेटवर्क और पूर्णा प्रज्ञा स्कूल सहित कई संस्थानों ने कैंटीन का मेन्यू पूरी तरह से बदल दिया है। स्कूलों में जन्मदिन के जश्न के लिए केक और मिठाइयों की जगह ताजे फलों का विकल्प दिया जा रहा है।

इस फैसले का अभिभावकों ने पूरा स्वागत किया है, लेकिन ‘इंडिया वाइड पेरेंट्स एसोसिएशन’ की अनुभा सहाय ने मांग की है कि स्कूल परिसर के बाहर जंक फूड बेचने वाले दुकानदारों पर भी प्रशासन को उतनी ही सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए।