कल्याण: श्मशान भूमि और दशक्रिया विधि केंद्र बदहाली के शिकार, कल्याण मनपाकी लापरवाही से नागरिकों में भारी आक्रोश
विशेष संवाददाता, कल्याण:
कल्याण शहर का विस्तार तेजी से हो रहा है और आबादी में कई गुना इजाफा हुआ है। इसके बावजूद, कल्याण-डोम्बिवली महानगरपालिका (केडीएमसी) की अनदेखी और खराब प्रबंधन के कारण शहर के मुख्य श्मशान घाट और एकमात्र दशक्रिया विधि केंद्र—जो अलग-अलग स्थानों पर स्थित हैं—दोनों की हालत बेहद दयनीय बनी हुई है। अंतिम संस्कार से लेकर शोक की घड़ी में होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों तक, नागरिकों को गंभीर असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
श्मशान भूमि में कचरे का ढेर और बंद पड़ी चिमनी
कल्याण (पश्चिम) में मुरबाड रोड (रोशन पेट्रोल पंप के पास) स्थित मुख्य हिंदू श्मशान भूमि इन दिनों कचरे का अड्डा बन चुकी है। कल्याण मनपा ने साफ-सफाई का ठेका कागजों पर एक निजी ठेकेदार को दिया है, लेकिन जमीन पर चारों तरफ गंदगी का आलम है।
शवदाह के दौरान निकलने वाले धुएं से राहत दिलाने और प्रदूषण रोकने के लिए लाखों की लागत से लगाई गई आधुनिक चिमनी प्रशासन की लापरवाही के कारण सालों से बंद पड़ी है और अब उसके आसपास भी कचरा जमा हो चुका है।
कडोमपा की लापरवाही: कल्याण का मुख्य श्मशान घाट बना कचरे का ढेर, जनता में आक्रोश
दशक्रिया विधि केंद्र में सुविधाओं का अभाव और शुल्क वसूली
दूसरी ओर, भगवा तालाब के पास स्थित शहर के एकमात्र दशक्रिया विधि केंद्र की स्थिति भी काफी चिंताजनक है। लगभग 1947-1950 के दौरान शुरू हुआ यह केंद्र वर्तमान में ‘ब्राह्मण सभा’ (पंडित वाड़ी) के प्रबंधन के अधीन है।
आरोप है कि यहाँ विधि के लिए आने वाले हर परिवार से ₹500 शुल्क लिया जाता है, लेकिन बदले में बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। हैंडपंप के पास जमा पानी से कीचड़ और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है।
इतना ही नहीं, केंद्र की बिजली, पंखे, लाइट और सफाई कर्मचारियों का खर्च भी यहाँ आने वाले स्थानीय गुरुजियों को अपनी जेब से देना पड़ रहा है।
जनता का आक्रोश और आंदोलन की चेतावनी
एक तरफ नगर निगम भगवा तालाब के सौंदर्यीकरण का दावा कर रहा है, तो दूसरी तरफ इसके पास में ही बदहाली झेल रहा दशक्रिया विधि केंद्र और मुरबाड रोड का श्मशान घाट प्रशासन के इन दावों की पोल खोल रहे हैं।
पूर्व नगरसेवक विद्याधर भोईर और स्थानीय सामाजिक संस्थाओं ने इस अव्यवस्था पर कड़ा एतराज जताया है। नागरिकों का कहना है कि यदि केडीएमसी और संबंधित प्रबंधन ने दोनों स्थानों की स्थिति में जल्द सुधार नहीं किया, तो जनता को मजबूरन उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।

