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भाजपा का चाल-चरित्र-चेहरा बेनकाब: अंबरनाथ में सत्ता के खातिर कांग्रेस से मिलाया हाथ, देशभर में हो रही थू-थू!

अंबरनाथ: राजनीति में शुचिता और ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का नारा देने वाली भारतीय जनता पार्टी का दोहरा मापदंड अंबरनाथ नगर परिषद के चुनाव में पूरी तरह बेनकाब हो गया है। सत्ता की हवस में अंधी हुई स्थानीय भाजपा ने उन्हीं कांग्रेसियों के साथ ‘अंबरनाथ विकास आघाडी’ बना ली, जिन्हें उनके शीर्ष नेता देश का दुश्मन बताते थकते नहीं। इस शर्मनाक गठबंधन के बाद देश भर के राजनीतिक गलियारों में भाजपा की जमकर किरकिरी हो रही है।

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सत्ता के लिए वैचारिक पतन

हैरानी की बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देवेंद्र फडणवीस जिस कांग्रेस को खत्म करने की बात करते हैं, अंबरनाथ में उसी कांग्रेस के १२ नगरसेवकों के समर्थन से भाजपा की तेजस्वी करंजुले ने नगराध्यक्ष की कुर्सी हथिया ली। सत्ता पाने के लिए भाजपा ने अपने ही सहयोगी दल ‘शिंदे सेना’ (शिवसेना) को किनारे कर दिया, जो २७ नगरसेवकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।

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कांग्रेस ने की कार्रवाई, पर भाजपा मौन

एक तरफ जहां कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व ने इस अनैतिक गठबंधन को ‘गद्दारी’ मानते हुए ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को निलंबित कर दिया और पूरी कार्यकारिणी बर्खास्त कर दी, वहीं दूसरी ओर भाजपा इस वैचारिक गिरावट पर चुप्पी साधे बैठी है। जनता अब सवाल पूछ रही है कि क्या भाजपा के लिए ‘सिद्धांत’ सिर्फ भाषणों तक सीमित हैं?

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मुख्य बिंदु जो भाजपा को कटघरे में खड़ा करते हैं:

दोहरा चरित्र: ऊपर से विरोध और अंदर से कांग्रेस के साथ गठबंधन।

गद्दारी: सबसे बड़े दल के रूप में उभरी सहयोगी शिंदे सेना (शिवसेना) को सत्ता से बेदखल करने की साजिश।

अवसरवाद: सत्ता के लिए किसी भी हद तक गिरने और किसी भी विचारधारा से समझौता करने का प्रमाण।

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शिंदे सेना में भारी आक्रोश

सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद पीठ में छुरा घोंपे जाने से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के कार्यकर्ताओं में भारी गुस्सा है। उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ‘नाराजगी’ जताने को भी महज एक नाटक बताया जा रहा है, क्योंकि जमीन पर भाजपा कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता के मजे लूट रही है।

क्या अब दलबदल का सहारा लेगी भाजपा?

चर्चा गरम है कि कांग्रेस द्वारा कार्रवाई किए जाने के बाद अब भाजपा इन १२ नगरसेवकों को बचाने के लिए उन्हें अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस में शरण दिला सकती है। अंबरनाथ की जनता भाजपा के इस ‘चाल-चरित्र और चेहरे’ को देखकर ठगा हुआ महसूस कर रही है।