तो उद्धव इस्तीफ़ा दे देंगे !
(अजय भट्टाचार्य )
महाराष्ट्र की सत्ता पर विराजमान महाविकास आघाडी को कांग्रेस के पूर्व सांसद यशवंत राव गडाख की सलाह को गंभीरता से लेना चाहिए। सत्ता स्थापना के बाद जिस तरह से विभिन्न मुद्दों पर सत्ता के घटकदलों में बयानबाजी देखने को मिल रही है उससे इस सरकार के स्थायित्व पे सवालिया निशान उठाना स्वाभाविक है।
इसलिए गडाख को सुनना/समझना जरुरी है। गडाख के अनुसार एक ही सरकार में शामिल कांग्रेस और राष्ट्रवादी पार्टियां अच्छा व्यवहार नहीं करती हैं, तो राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे किसी भी समय इस्तीफा दे देंगे। इसके पीछे गडाख का तर्क है कि उद्धव ठाकरे मूलत: राजनेता नहीं हैं। वे कलाकार/ छायाचित्रकार और वचन निभाने वाले व्यक्ति हैं। इसलिए यदि उनको मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य प्रदान करना है, तो कांग्रेस और राकांपा को टकराव कम करना चाहिए और उद्धव ठाकरे का आभार मानना चाहिये।
पूर्व कांग्रेस नेता यशवंतराव गडाख ने उद्धव ठाकरे को धन्यवाद देने की सलाह दी। राज्य के जल संरक्षण मंत्री शंकरराव गडाख द्वारा नेवासे तालुका में आयोजित एक स्वागत समारोह में गडाख ने अपनी राय सार्वजानिक कर कांग्रेस और राकांपा को संयमित व्यवहार की सलाह दी। गडाख के मुताबिक अगर उद्धव ठाकरे ने फैसला नहीं किया होता, तो ये दोनों पार्टियां विपक्ष में दिखाई देतीं। अब ग्रामीण इलाकों की सरकार सत्ता में आ गई है।
शहर की सरकार चली गई है। बंगलों के लिए मंत्रियों में मची होड़ पर गडाख ने ताना कसा कि गांवों का/में काम और विकास करने के लिए बंगलों की जरुरत क्या है। गडाख का साफ इशारा था कि विभागों के आवंटन से लेकर बंगलों के आवंटन तक जिस तरह से कांग्रेस और राकांपा के मंत्रियों का रोज रूठना, मानना चल रहा है,
इसे और ऐसे विवादों पर तुरंत विराम लगना चाहिए। गडाख के बहाने ही सही महाराष्ट्र की सत्ता की भीतरी खींच तान वास्तव में सत्ता की स्थिरता के लिए एक खतरे की घंटी है। सावरकर, इंदिरा-करीमलाला भेंट. नागरिकता कानून जैसे मुद्दों पर घटक दलों का में मतैक्य न होना दुर्भाग्य पूर्ण ही कहा जा सकता है।

