कल्याण कांग्रेस: संजय दत्त बनाम नवीन सिंह गुट की खींचतान ने फिर किया कांग्रेस को हाशिए पर
कल्याण कांग्रेस: संजय दत्त बनाम नवीन सिंह गुट की खींचतान ने फिर किया कांग्रेस को हाशिए पर
कल्याण – अपना वजूद बचाने के लिए संघर्ष कर रही कल्याण जिला कांग्रेस एक बार फिर अपने पुराने रोग – गुटबाजी – से ग्रस्त हो गई है। इस बार लड़ाई आर-पार की है। एक तरफ हैं महाराष्ट्र के दिग्गज नेता संजय दत्त, जो कल्याण पर अपना एकछत्र वर्चस्व बनाए रखना चाहते हैं, तो दूसरी तरफ हैं प्रदेश में मजबूत पकड़ रखने वाले नवनियुक्त जिलाध्यक्ष नवीन सिंह। दोनों गुटों के टकराव ने कल्याण कांग्रेस को फिर से रसातल में धकेल दिया है।
जरा आंकड़ों पर गौर कीजिए। जिस कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में कभी कांग्रेस के नगरसेवकों की गिनती दो अंकों में होती थी, आज वह सिमट कर महज दो नगरसेविकाओं तक रह गई है। और त्रासदी यह है कि ये दो ही बची हुई जनप्रतिनिधि भी दो धड़ों में बंटी हैं।
KDMC में कांग्रेस की गुट नेता कांचन कुलकर्णी खुलेआम संजय दत्त गुट की सिपहसालार हैं, जबकि दूसरी नगरसेविका समीना शेख नवीन सिंह खेमे में हैं। नतीजा? पार्टी का अपना गुट नेता कार्यालय भी बंटवारे का प्रतीक बन गया है। समीना शेख वहां कदम तक नहीं रखतीं और कांचन कुलकर्णी, जिलाध्यक्ष नवीन सिंह के किसी भी आंदोलन, कार्यक्रम या बैठक से दूरी बनाए रखती हैं।
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यह मनमुटाव सिर्फ दो नगरसेविकाओं का नहीं, वर्चस्व की बड़ी लड़ाई का नतीजा है। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, संजय दत्त अपनी पसंद का जिलाध्यक्ष चाहते थे, लेकिन नवीन सिंह ने प्रदेश नेतृत्व में अपनी पैठ का इस्तेमाल कर सीधे अध्यक्ष पद पर अपनी मुहर लगवा ली। संजय दत्त को दरकिनार किए जाने के बाद से ही यह घमासान सतह पर आ गया।
इन परिस्थितियों में कांग्रेस राज्य नेतृत्व हस्तक्षेप कर स्थानीय में स्तर पर नेताओं के मतभेद को दूर करने के प्रयास किए जाने आवश्यक है। एक तरफ जहां पार्टी स्तर पर निर्वाचित सदस्या कंचन कुलकर्णी को पार्टी में आवश्यक महत्व देने की आवश्यकता है। वही संगठनात्मक दृष्टिकोण से जिला अध्यक्ष की गरिमा भी बनी रहे इसका ध्यान प्रदेश स्तर के कांग्रेसी नेताओं को रखना चाहिए
कल्याण जिला कांग्रेस में गुटबाजी कितनी शर्मनाक हद तक पहुंच चुकी है, इसका अंदाजा इसी से लगता है कि कुछ समय पहले प्रभारी जिलाध्यक्ष राजकुमार पातकर के साथ खुद गुट नेता कांचन कुलकर्णी ने पदाधिकारियों के सामने हाथापाई कर दी थी। चर्चा है कि यह पूरी घटना संजय दत्त के इशारे पर हुई थी। हैरानी की बात है कि इतनी बड़ी अनुशासनहीनता के बाद भी हाईकमान ने कांचन पर कोई कार्रवाई नहीं की, और वह चुनाव जीत कर गुट नेता की कुर्सी पर बैठ गईं।
आज स्थिति यह है कि कांचन कुलकर्णी हर मौके पर जिलाध्यक्ष नवीन सिंह को नीचा दिखाने का कोई अवसर नहीं छोड़तीं। राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के समर्थन में नवीन सिंह द्वारा आयोजित आंदोलन से भी वह नदारद रहीं। तो वहीं कांग्रेस की युवा इकाई भी परोक्ष रूप से कांचन के साथ खड़ी होकर नवीन सिंह को जिला स्तर पर कमजोर करने में जुटी है।
दूसरी ओर, समीना शेख ने शुरुआत में गुट नेता पद के लिए अपनी दावेदारी और नाराजगी खुलकर जताई थी, लेकिन पद तो किसी एक को दिया जा सकता था तो समीना शेख की आवाज को आलाकमान ने अनसुना कर दिया। नतीजा, आज गुट नेता कार्यालय में सन्नाटा पसरा है और अकेली कांचन कुलकर्णी ही वहां काबिज हैं।
ऐसे में यह साफ है, जनता के मुद्दों पर लड़ने के बजाय कल्याण कांग्रेस अपने ही भीतर लड़कर खत्म हो रही है। अगर यही हाल रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब KDMC में बची हुई दो सीटें भी कांग्रेस के हाथ से निकल जाएंगी और कल्याण में कांग्रेस सिर्फ इतिहास के पन्नों में रह जाएगी।

