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भाजपा विधायक परिणय फुके की राज ठाकरे पर टिप्पणी और मनसे नेता राजू पाटील का पलटवार

भाजपा विधायक परिणय फुके की राज ठाकरे पर टिप्पणी और मनसे नेता राजू पाटील का पलटवार

कस्तूरी यादव 

महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय सत्ताधारी भाजपा और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी चल रही है। भाजपा के विधान परिषद विधायक परिणय फुके द्वारा मनसे प्रमुख राज ठाकरे पर की गई टिप्पणी का, मनसे नेता और कल्याण ग्रामीण के पूर्व विधायक प्रमोद (राजू) रतन पाटील ने सोशल मीडिया के माध्यम से अत्यंत आक्रामक और करारा जवाब दिया है।

परिणय फुके की राज ठाकरे पर क्या टिप्पणी थी?

भाजपा नेता परिणय फुके ने राज ठाकरे की भूमिका और सुरक्षा पर कड़ा प्रहार किया था:

सुरक्षा को लेकर सवाल: फुके ने यह सवाल उठाया था कि राज ठाकरे के पास इस समय कोई संवैधानिक पद न होने के बावजूद उन्हें राज्य सरकार द्वारा भारी पुलिस सुरक्षा क्यों दी गई है।

राजनीतिक अस्तित्व पर निशाना: राज ठाकरे की रैलियों और आंदोलनों को लेकर भी तीखे बयान दिए गए थे।

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मनसे नेता राजू पाटील का कड़ा जवाब

फुके की इस टिप्पणी के बाद मनसे नेता राजू पाटील ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के द्वारा पुराने राजनीतिक समीकरणों की याद दिलाते हुए विधायक फुके को आड़े हाथों लिया:

इतिहास न भूलें: राजू पाटील ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में यह जिक्र किया है कि “परिणय फुके साहब, इतिहास मत भूलिए! राज साहब ठाकरे पर टीका करते समय आपको अपने राजनीतिक सफर पर भी विचार करना चाहिए।”

विधान परिषद चुनाव के वोटों की याद: राजू पाटील ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा, “जब मैं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का विधायक था, तब मैंने आपको अपना वोट दिया था (बेचा नहीं था भाई!)। इसलिए आज आपको विधान परिषद के विधायक के रूप में राज साहब पर इस तरह से बोलने और डींगें हांकने का मौका मिला है, इस पर विचार करें!”

राजनीतिक कृतित्व: राज साहब की सुरक्षा पर बात करने से बेहतर है कि उनके राजनीतिक कर्तृत्व और महाराष्ट्र के लिए उनके द्वारा उठाए गए कदमों पर विचार किया जाए।

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उपकारों की याद: राज साहब ने हमें यह सीख दी है कि किसी पर किए गए उपकार कभी बोलकर नहीं जताए जाते; लेकिन आज मजबूरी में फुकें के बयानों के कारण इस बात को सार्वजनिक करना पड़ रहा है।

कृतज्ञता का मुद्दा: इस पूरे विवाद में राजू पाटील ने परिणय फुके की पुरानी चुनावी जीत का संदर्भ देकर राजनीतिक कृतज्ञता का मुद्दा उठाया है। जिस पार्टी या नेता के विधायक ने उन्हें कभी संकट के समय मदद की थी, उसी पार्टी के प्रमुख पर आज सत्ता के प्रभाव में आकर टीका-टिप्पणी करना कितना उचित है, यह सवाल मनसे द्वारा उठाया जा रहा है।

बढ़ता तनाव: इस वाकयुद्ध के बाद भाजपा और मनसे के बीच का संघर्ष और अधिक गहराने की संभावना है, जिससे आने वाले दिनों में दोनों दलों के नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो सकती है।