राम मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों पर करोड़ों के गबन का आरोप, कल्याण में कांग्रेस नेताओं ने पुलिस में दी शिकायत
कल्याण शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट नवीन सिंह और अन्य पदाधिकारियों द्वारा महात्मा फुले पुलिस स्टेशन (कल्याण पश्चिम) में श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। इस शिकायत पत्र में ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास और महासचिव चंपत राय सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों पर वित्तीय हेराफेरी, आपराधिक साजिश और सबूत मिटाने के आरोप लगाते हुए एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग की गई है।
यह शिकायत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 173(1) के तहत दी गई है।
मुख्य आरोपी और कानूनी धाराएं
शिकायत में मुख्य रूप से निम्नलिखित पदाधिकारियों को नामजद किया गया है:
महंत नृत्य गोपाल दास (अध्यक्ष, श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट)
चंपत राय (सरचिटणीस/महासचिव, श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट)
डॉ. अनिल मिश्रा (विश्वस्त/ट्रस्टी)
गोविंद देव गिरी (कोषाध्यक्ष)
गोपाल राव (अधिकारी, श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट)
लागू करने की मांग की गई धाराएं: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5), 61, 3(5), 238; भ्रष्टाचार प्रतिबंधक कायदा, 1988 और मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 3।
राम मंदिर ट्रस्ट के कथित घोटाले के खिलाफ कल्याण में कांग्रेस का ‘रघुपति राघव राजाराम सत्याग्रह’ कल
शिकायत में लगाए गए मुख्य आरोप
रोजाना 6-8 लाख रुपये का गबन: वित्तीय वर्ष 2024-25 में ट्रस्ट को करीब ₹3327 करोड़ की आय हुई। मोजणी (गिनती) कर्मचारियों को हटाए जाने के तुरंत बाद बैंक में दैनिक जमा राशि ₹16-18 लाख से बढ़कर ₹24 लाख प्रति दिन हो गई, जिससे साफ है कि पहले हर दिन ₹6 से ₹8 लाख का गबन किया जा रहा था। 2025 के कुंभ मेले के दौरान भी भारी वित्तीय हेराफेरी का आरोप है।
जमीन खरीद में धांधली: जून 2021 में ₹12 करोड़ मूल्य की जमीन को कुछ ही मिनटों में ट्रस्ट को ₹18.5 करोड़ में बेचा गया। इसके अलावा, 2 अप्रैल 2024 को सरकारी (नज़ूल) घोषित जमीन के एक टुकड़े को ₹23.61 करोड़ में खरीदा गया।
SBI की चेतावनियों को ठुकराना: मार्च से मई 2026 के बीच स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने ₹500 के नोटों के बंडलों में कमी आने की बात कहकर पैसे गिनने वाले स्टाफ को रोटेट करने की सिफारिश की थी, जिसे आरोपियों ने खारिज कर दिया।
सबूत मिटाना और कनिष्ठों को बचाना: आरोप है कि मई 2026 के अंत में आरोपियों ने हिडन कैमरों में कर्मचारियों को चोरी करते देखा, लेकिन पुलिस को बताने के बजाय आंतरिक जांच की और इस दौरान सीसीटीवी रिकॉर्ड को डिलीट या टैंपर कर दिया। बाद में 25 जून 2026 को ट्रस्ट की ओर से जो एफआईआर दर्ज कराई गई, उसमें केवल 8 निचले स्तर के कर्मचारियों को नामजद कर उच्च प्रबंधन को बचा लिया गया।
ED जांच और पुलिस कस्टडी की मांग
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह देश के करोड़ों रामभक्तों की आस्था और उनकी गाढ़ी कमाई के साथ हुआ बड़ा विश्वासघात है। उन्होंने पुलिस से मांग की है कि आरोपियों को तुरंत पुलिस कस्टडी में लेकर पूछताछ की जाए और इस महाघोटाले में शामिल मनी लॉन्ड्रिंग के ऐंगल को देखते हुए इस शिकायत की एक कॉपी प्रवर्तन निदेशालय (ED) को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेजी जाए।

