टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: मुंबई से कोटा तक का फिल्मी सफर और पुलिस का ‘डिजिटल जाल’, ऐसे धरे गए आरोपी
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: मुंबई से कोटा तक का फिल्मी सफर और पुलिस का ‘डिजिटल जाल’, ऐसे धरे गए आरोपी
मुंबई/कोटा: बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर हुई ताबड़तोड़ फायरिंग के मामले में पुलिस ने आधुनिक तकनीक और शानदार कोऑर्डिनेशन का परिचय देते हुए महज कुछ ही घंटों में आरोपियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया।
मुंबई क्राइम ब्रांच की तकनीकी सर्विलांस और टावर डंप जैसी आधुनिक टेक्नोलॉजी के सटीक इस्तेमाल ने आरोपियों के हर एक कदम की पल-पल की जानकारी सुरक्षा एजेंसियों तक पहुँचा दी, जिसके बाद राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन पर उन्हें फिल्मी अंदाज में दबोच लिया गया।
टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग और मुंबई में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर पनपता फर्जी ‘सिंडिकेट’
मुंबई से सूरत और फिर कोटा: क्या था आरोपियों का पूरा रूट?
जांच में खुलासा हुआ है कि वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने और भागने के साधन बदल रहे थे। उनका मुख्य मकसद नेपाल भागना था:
अंधेरी तक बाइक: फायरिंग के तुरंत बाद आरोपी एक बाइक पर सवार होकर तेजी से अंधेरी रेलवे स्टेशन पहुंचे।
बोरीवली तक लोकल ट्रेन: पहचान छिपाने के लिए उन्होंने लोकल ट्रेन का सहारा लिया और बोरीवली स्टेशन तक का सफर तय किया।
सूरत तक कैब: बोरीवली उतरने के बाद आरोपियों ने एक कैब बुक की और सड़क मार्ग के जरिए सीधे गुजरात के सूरत जा पहुंचे।
ट्रेन से कोटा का सफर: पहले उनका प्लान सूरत से बस पकड़कर आगे निकलने का था, लेकिन असमंजस के चलते उन्होंने अंतिम समय में प्लान बदला और सूरत रेलवे स्टेशन से कोटा जाने वाली ट्रेन में सवार हो गए।
मॉडर्न टेक्नोलॉजी और ‘टावर डंप’ बना पुलिस का ब्रह्मास्त्र
इस पूरे ऑपरेशन की सबसे खास बात यह रही कि मुंबई पुलिस ने घटनास्थल और उसके आसपास के रूट के मोबाइल टॉवरों का डेटा (टावर डंप और सीडीआर एनालिसिस) खंगालना शुरू कर दिया था।
जिसमें आरोपियों के घटना स्थल पर उपस्थिति और फायरिंग के बाद उनके मूवमेंट में उनके मोबाइल नम्बर की पहचान होना, फिर आरोपियों के मोबाइल नंबरों के जरिए पुलिस उनकी रियल-टाइम जियो-लोकेशन ट्रैक कर रही थी।
जैसे ही आरोपियों ने बाइक, लोकल ट्रेन, कैब और फिर लंबी दूरी की ट्रेन बदली, उनकी डिजिटल मूवमेंट लगातार मुंबई क्राइम ब्रांच की रडार पर बनी रही।
इसी सटीक लोकेशन इनपुट को तुरंत राजस्थान एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) और कोटा पुलिस के साथ साझा किया गया, जिससे कोटा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन रुकते ही आरोपियों को घेरकर दबोचना आसान हो गया।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग से कनेक्शन और गिरफ्तारियां
कोटा रेलवे स्टेशन पर पकड़े गए संदिग्धों की पहचान रेहान उर्फ सुक्का (सोनीपत, हरियाणा), ऋतिक कुर्मी उर्फ रोशन (बेगूसराय, बिहार) और एक नाबालिग के रूप में हुई है।
शुरुआती पूछताछ में यह बड़े खुलासे हुए हैं कि मुख्य आरोपी रेहान, अनिल पंडित के संपर्क में था, जिसके तार कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े बताए जा रहे हैं।
पुलिस अब इस एंगल से भी गहराई से जांच कर रही है कि इस सनसनीखेज हमले के पीछे इस गैंग का क्या और कितना बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।
मुख्यमंत्री ने की कोटा पुलिस की सराहना
इस त्वरित और साहसिक ऑपरेशन को अंजाम देने वाली कोटा पुलिस की हर तरफ तारीफ हो रही है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने खुद कोटा पुलिस अधीक्षक (SP) तेजस्विनी गौतम और उनकी पूरी टीम को फोन कर बधाई दी और उनकी कार्यकुशलता की सराहना की।
फिलहाल, मुंबई और राजस्थान पुलिस की संयुक्त टीमें इस मामले से जुड़े अन्य मददगारों और साजिशकर्ताओं की तलाश में जुटी हैं।

