राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा कल्याण लोक सभा चुनाव में अपने पार्टी से उम्मीदवार को उतारने के तैयारी क तहत की गई मोर्चाबंदी में यहां के सभी 6 के 6 विधानसभा क्षेत्र में बेहद सटीक ढंग से मोर्चा बंदी की है.
लेकिन जैसे-जैसे चुनाव मतदान की तिथी नजदीक आते जा रही है मुख्यमंत्री शिंदे की मोर्चाबंदी की अनेक खामियां सामने आने लगी है और और इन गलतियों के परिणाम निश्चित रूप से आत्मघाती साबित हो सकते हैं.
ज्ञात हो कि कल्याण लोकसभा चुनाव के पूर्व में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा की गई मोर्चाबंदी में उल्हासनगर विधानसभा क्षेत्र से अपने उम्मीदवार को मताधिक्य दिलाने के लिए वहां के पूर्व विधायक पप्पू कालानी को अपने पक्ष में कर लिया था.
लेकिन उन्होंने यहां से राज्य में महायुती के घटक दल भारतीय जनता पार्टी के विधायक कुमार अयलानी को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जो आज तक जारी है.
इससे निश्चित रूप से कल्याण लोक सभा क्षेत्र से खड़े शिवसेना शिंदे गुट के उम्मीदवार डॉक्टर श्रीकांत शिंदे को नुकसान होने का की पूरी संभावना है.
जब बात उल्हासनगर विधानसभा क्षेत्र की होती है तो वहां से पप्पू कालानी गुट और कुमार अयलानी गुट (या फिर भाजपा उम्मिदवार मे) दोनों में हर विधानसभा चुनाव में कांटे की टक्कर होती है
और हर चुनाव में एक बार अगर पप्पू कालानी जीते हैं तो दूसरी बार कुमार अयलानी की जीत होती है.
ऐसे में चुनाव के पहले ही राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा उल्हासनगर के भाजपा के विधायक कुमार अयलानी के कट्टर विरोधी पप्पू कालानी से समझौता कर लेना पूरे भारतीय जनता पार्टी उल्हासनगर जिला के कार्यकर्ताओं को शर्मनाक लगा है.
और वह इस चुनाव में अभी तक महायुती के उम्मीदवार श्रीकांत शिंदे को सबक सिखाने के मूड में है
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