भाजपाइयों द्वारा डोंबिवली में मराठा युवक और पत्रकारों से सार्वजनिक तौर पर दादागिरी सही है क्या ??
भारतीय जनता पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले भाजपा महाविजय २०२४ संकल्प यात्रा के तहत आज रविवार को डोंबिवली आए थे।
इस कार्यक्रम में मराठा समाज के युवक द्वारा विरोध दर्ज करने के तहत पत्रकारों से बातचीत की कोशिश को दादागिरी कर बंद करवा दिया गया।
इस दौरान भाजपा समर्थकों ने मराठा युवक से बातचीत कर रहे पत्रकारों से भी धक्का मुक्की की। क्या यह अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार का हनन नहीं है?
महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष बावनकुले का कल्याण जिले भर के भाजपाइयों ने जोरदार स्वागत किया और उनके भाषण के दौरान मराठा युवक शिवाजी पाटिल ने “एक मराठा लाख मराठा” घोषणाबाजी की। जिस पर मंजे हुए राजनीतिज्ञ की तरह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बावनकुले ने युवक शिवाजी पाटिल को स्टेज पर बुलाकर बिठा लिया जिससे वह शांत हो गया ।
लेकिन कार्यक्रम खत्म होने के बाद जब कुछ पत्रकारों ने उस युवक को एक तरफ ले जाकर बात करने की कोशिश की तो वहां उपस्थित भाजपा कार्यकर्ताओं ने मराठा युवक शिवाजी पाटिल के साथ बातचीत कर रहे पत्रकारों को भी धक्कामुक्की कर अलग-थलग कर दिया और मराठा युवक को जबरन पकड़ के पत्रकारों से दूर लेकर चले गए। अचानक हुए इस घटनाक्रम से पत्रकार भी सहम गए और कुछ बोल नहीं पाए।
इसे भाजपाइयों की दादागिरी नहीं कही जाएगी तो और क्या है ??
राज्य भर में मराठा आरक्षण के लिए हर जिले, हर शहर, हर गांव में जोर-शोर से आंदोलन चल रहा है और मराठा समाज के आंदोलनकारी ने यह साफ कर दिया है कि जब तक राज्य सरकार मराठा समाज को आरक्षण नहीं दे देती है तब तक किसी भी गांव, किसी भी शहर, किसी भी जिले में किसी भी राजनीतिक दल के नेताओं को सार्वजनिक कार्यक्रम में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
अब आते हैं मुख्य मुद्दे पर!
मराठा समाज को महज 30 दिन में आरक्षण देने का आश्वासन राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मनोज जरंगे पाटिल को दिया था और इसी आश्वासन के बाद जारंगे पाटिल ने अपना अनशन तोडा था।
लेकिन उस आश्वासन के 40 दिन बाद भी मराठा सरकार को आरक्षण देने में राज्य सरकार पूरी तरह से विफल साबित हुई और मराठा समाज को और समय देने की बात कह रही है।
अगर संभव नहीं था तो राज्य के मुखमंत्री एकनाथ शिंदे ने महज ३० दिन में मराठा समाज को निश्चित तौर पर आरक्षण देने का आश्वासन क्यों दिया था ?
ऐसे में वर्षों से मराठा आरक्षण के लिए आंदोलनरत समाज के आंदोलनकारी का उग्र होना स्वाभाविक है, और ये लोग राज्य भर के गांव में सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को सार्वजनिक कार्यक्रम करने से रोकने का प्रयास कर रहे हैं तो इसके लिए दोषी कौन है ?
और इन आंदोलनकारी को डोंबिवली के भाजपाइयों द्वारा ऐसे दादागिरी करके शांत करने की कोशिश से मराठा समाज में क्या प्रतिक्रिया हो सकती इसका भान राज्य सरकार को होना चाहिए !

