मुंबई के मूल भूमिपुत्र आगरी – कोली समाज को खतरा जितना परप्रांतीयो से है उससे ज्यादा यहां महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से आकर बसे मराठी माणुस से भी
मुंबई तथा इसके उपनगरो का मुख्य भूमिपुत्र यहां का आगरी और कोली समाज रहा है। जिनका मुख्य पेशा खेती और मछली पकड़ना रहा है। लेकिन बढ़ते शहरीकरण ने परिस्थितियों के साथ उनके परिवेश, उनकी संस्कृती, उनकी सभ्यता, उनकी भाषा के साथ उनके अस्तित्व पर भी खतरा उत्पन्न कर दिया है।
इसका कारण मुंबई तथा इसके उपनगरो में देश भर के साथ महाराष्ट्र के सभी जिलों से यह आकर रहने और बसने वाले लोग है। जो पहले तो शरणार्थी बनकर और रोजगार पाने के लिए मुंबई और इसके उपनगरों में आकर रहे और धीरे धीरे अपना स्थाई आवास बना लिया।
अब ये लोगों का वर्चस्व इतना बढ़ गया है कि मुंबई के साथ इसके उपनगरों में यहां के विभिन्न सामाजिक, राजनैतिक या सार्वजनिक आयोजनों में भूमिपुत्रों की उपस्थिति न के बराबर हो गई है। उन्हें अपने अस्तित्व का खतरा लगने लगा है।
सबसे बुरा हाल तो इस समाज के रहन सहन और परिवेश पर पड़ा है। आगरी कोली समाज हमेशा से मस्तमौला जीवन जीने में विश्वास करता है। इनकी शादियां या सार्वजनिक समारोह शानदार हुआ करते थे।
लेकिन अब अनेक हल्दी कार्यक्रम में बैंड बाजे के विरुद्ध पुलिस थानों में शिकायत कर दी जाती है। इनकी शादियों में अब अनेक व्यवधान उत्पन्न होने लगे है। इनके कुलदेवियों के तिथि के अनुसार वार्षिक मेला का आयोजन होता रहा है। जिसमें इस समाज के लोग दूर दूर से आकर एक दूसरे से मिलते है
लेकिन अब मंदिरों के आसपास की जगह का व्यावसायिक स्वरूप होजाने और बाहरी लोगों के द्वारा हुड़दंग करने के कारण इन आयोजनों का स्वरूप छोटा होता जा रहा है।
इस समाज की अपनी अलग भाषा, अपनी संस्कृति, अलग रीति रिवाज, अलग रहन सहन है। लेकिन बढ़ती भीड़ में यहां का आगरी कोली समाज अपनी भाषा, अपनी संस्कृति, अपने रीति रिवाज खोता चला जा रहा है। जिससे इन्हें अपने अस्तित्व का खतरा मंडराने लगा है।
भूमिपुत्रों को जो सबसे ज्यादा खटकने वाली बात है वो ये कि उनके साथ यहां रह रहे महाराष्ट्र के अन्य जिलों के लोग उन्हें अलग नजर से देखता है। और हर संभव दूरी बना कर रखते है।
मुंबई भले ही देश की आर्थिक राजधानी है लेकिन यहां के व्यावसायिक कार्यालय में यहां का मुख्य भूमिपुत्र समाज के लोगों को कितना प्रतिशत रोजगार मिला है यह जांच का विषय है।
यह के भूमि पुत्रों का सबसे बुरा हाल तो राजनीति में हैं यहां के सभी राजनीतिक दल का कोई भी भूमिपुत्र नेता, प्रदेश छोड़ो मुंबई अध्यक्ष पद पर नहीं है।
कांग्रेस पूर्व वार्ड अध्यक्ष अरुण भोईर के अनुसार राजनीति रोटी सेकने के लिए राजनीतिक दल भले ही हिंदी मराठी विवाद फैलाए। लेकिन हमारे यहां के मूल भूमिपुत्र आगरी – कोली समाज को खतरा जितना परप्रांतीयो से है उससे ज्यादा यहां महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से आकर बसे मराठी माणुस से भी है.
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