कल्याण- मशहूर फिल्म कलाकार गोविंदा के बाद कल्याण के भवन निर्माता मंगेश गायकर के हाथों गलती से गोली चल गयी। इस गोली चालन में दोनों खुद घायल हो गये।
काफी कम अंतराल के बाद हुए इन दोनों हादसो ने लायसंसी रिवाल्वर धारी नामी हस्तियों को लेकर अनगिनत सवाल खडे कर दिए हैं। जो कि मौजूदा समय में जायज भी हैं ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार गोविंदा और मंगेश गायकर दोनों का मामला एक जैसा ही है। दोनों ने पुलिस को दिए बयान में कहा है कि उनसे गलती से गोली चल गयी और हादसा हो गया। गोविंदा वाली घटना में वह सुबह रिवाल्वर साफ कर रहे थे और उन्हें इस बात का एहसास तक नहीं था कि रिवाल्वर में गोली मौजूद है।
भाजपा के पूर्व नगरसेवक मंगेश गायकर से चली गोली , मंगेश और उसका पुत्र जख्मी
अचानक रिवाल्वर का ट्रिगर दब गया और गोली गोविंदा की जांघ को छू कर निकल गयी। मंगेश गायकर के मामले में जो बात सामने आयी है । उसके अनुसार वह अपने कार्यालय में अपने व्यवसायिक मित्रों के साथ बैठे थे।
उनके हाथ में रिवाल्वर था। अचानक रिवाल्वर से गोली चली और उनके हाथ को छूते हुए कार्यालय में लगे कांच पर जा लगी। इस दुर्घटना में मंगेश का लडका शामल गायकर भी कांच लगने से घायल हो गया।
अब सवाल यह उठता है कि जब ऐसे लोगों को स्वयं की सुरक्षा के लिए लाइसेंसी रिवाल्वर रखने की इजाजत दी जाती है तो उस रिवाल्वर को इस्तेमाल करने के तौर तरीके नहीं समझाए जाते ? लाइसेंसी रिवाल्वर के बारे में तय मानकों का पालन ना करने वालों का लाइसेंस रद्द करने का भी नियम होना चाहिए।
क्योंकि इन लाइसेंस धारकों की गलती की वजह से किसी की जान जा सकती है और तो और खुद रिवाल्वर रखने वाले की जान भी जोखिम में पड सकती है।
वैसे जब रिवाल्वर और उसका लाइसेंस जारी किया जाता है तो रिवाल्वर धारक को रिवाल्वर के बारे में प्रशिक्षण दिया जाता है जो कि तकरीबन एक सप्ताह का होता है।
ऐसे में भी यदि अपनी शान के लिए रिवाल्वर रखने वाले गंभीरता को नहीं समझते हैं तो सीधे तौर पर इनका लाइसेंस रद्द करना चाहिए क्योंकि यह आग्नेय शस्त्र है कोई दिपावली में छोटे बच्चों के हाथ में दी जाने वाली खिलौना पिस्तौल नहीं है।
कुल मिलाकर कल्याण और उसके पहले मुंबई की घटना ने लाइसेंसी रिवाल्वर धारकों को लेकर काफी सवाल खडे कर दिए हैं । गृह मंत्रालय को इस बारे में गंभीरता से विचार करना ही होगा।
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