सिध्धू और महबूबा जैसे दोगले ही अब भी पकिस्तान से बातचीत की सलाह दे सकते है.
पुलवामा हमले में ४० सीआरपीएफ जबानो की शहादत पर जहा केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने कडा रुख अपनाते हुए पाकिस्तान को दिए सबसे चहेते राष्ट्र का दर्जा वापस ले लिया है,वही रेलवे के वन्दे एक्सप्रेस नामक नयी ट्रेन के उद्घाटन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस मामले में सलिप्त सभी लोगो पर कड़ी कारवाई की चेतावनी दी है. लेकिन इतने बड़े हादसे के बावजूद अभी भी काश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती और पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिध्धू बातचीत से ही मामला सुलझने का सुझाव, मिडिया में जारी अपने बयान से दे रहे है और ऐसे राजनेताओं को दोगले की उपाधि दी जाए तो अतिशियोक्ति नही होगो.जो रहते तो भारत में है लेकिन समय समय पर ऐसी हरकते कर देते है जिससे देश की छवि अंतरराष्ट्रीय पटल पर धूमिल हो.
गौरतलब है कि पुलवामा में बृहस्पतिवार को जम्मू से कश्मीर जारहे ७० -वाहनों में सवार सीआरपीएफ जवानों को जैश-ए-मोहम्मद के एक आतंकवादी ने विस्फोटकों से लदे वाहन से टक्कर मार दी, जिससे हुए जोरदार धमाके में कम से कम 40 जवान शहीद हो गए जबकि कई गंभीर रूप से घायल हैं।धमाके के बाद भी आसपास छुपे हथियारबंद आतंकवादियों ने फायरिंग की.इस घटना की तीखी प्रतिक्रिया देश भर में देखि जा रही है.इस घटना से सदमे में देशवासियों ने के अनेक हिस्सों में स्वस्फूर्त बंद रखा.
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आज सुबह सम्पन्न महत्वपूर्ण बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने चेतावनी देते हुए कहा कि सुरक्षा के संबंध में सुरक्षा बल सभी संभव कदम उठायेंगे। इसमें सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ जिन लोगों ने यह अपराध (सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकवादी हमला) किया है और जिन लोगों ने उसमें सक्रिय समर्थन दिया है…. ‘‘ उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।’’ उन्होंने बताया कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह थोड़ी देर में श्रीनगर जा रहे हैं, उनके साथ कुछ अधिकारी भी जा रहे हैं। गृह मंत्री संभवत: शनिवार को लौट आयेंगे। इसके बाद सभी राजनीति दलों के साथ चर्चा करेंगे।
आजादी के बाद से चल रहे काश्मीर समस्याओ को सुलझाने के प्रयास लगातार जारी है बावजूद इसके हर बातचीत के दुसरे दिन ही घाटी में ऐसे ही दर्दनाक घटनाओं को अंजाम देकर आतंकवादी अपने मंसूबे जाहिर कर देते है.केंद्र की मोदी सरकार ने अपने पिछले साढ़े चार साल में काश्मीर समस्या सुलझाने का शिद्दत से प्रयास किया.और अभी उन्हें सफलता भी मिलने लगी थी.भारतीय सेना द्वारा आतंकवाद के विरुद्ध चलाये गए उनके आल आउट अभियान से जम्मू काश्मीर के कुल २२ जिलो में से सिर्फ ५ जिलो में ही आतंकवादियों का प्रभाव बचा है.इस अभियान में राज्य भर के सैकड़ो आतंकवादी मारे गए है.और इन आतंकी संगठनो के विदेश में बैठे आकाओं की नींद हराम हो गयी है.इस सच्चाई को पूरा देश जानता है और इसी मोर्चाबंदी के परिणाम है यह आत्मघाती हमला.भारत काश्मीर से आतंकवाद खत्म करने के अपने अभियान के अंतिम चरण में है.और अगर केंद्र में दुबारा मोदी सरकार आई तो अगले कुछ ही महीनो में काश्मीर भी देश के अन्य राज्यों की तरह शान्ति प्रिय राज्य बन जाएगा.
लेकिन देश में ही अभी भी जम्मू काश्मीर की मुख्यमंर्त्री महबूबा मुफ़्ती और किकेट खिलाड़ी से नेता बने और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के पिठ्ठू नवजोत सिंह सिधधू जैसे नेता है जो इस मामले में बातचीत कर मामला सुलझाने की तरफदारी की है.महबूबा मुफ़्ती को जहा काश्मीर में राजनीति करनी है वही सिध्धू को अपने दोस्त इमरान खान से दोस्ती बनाए रखने की फ़िक्र है.इसीलिए ये लोग पाकिस्तान का विरोध किये बिना भारतीय सरकार पर बातचित नहीं करने का आरोप लगाकर घटना के लिए अपरोक्ष रूप से भारत सरकार को दोषी ठहराने की कोशिश कर रहे है.

