बिखरा विपक्ष – २०१९ लोकसभा चुनाव में राह आसान हो रही है भाजपा की,
देश में लगातार बदलते राजनीतिक घटनाक्रम से ये साफ़ जाहिर हो रहा है की कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी राफेल मुद्दे पर हर सुबह से शाम तक देशभर से विदेश में घूम घूम कर भले ही चौकीदार चोर है के नारे लगाते रहे, लेकिन 2019 में एक बार फिर भारी बहुमत से केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आनी लगभग तय है
गत वर्ष कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में देश भर के विरोधी दलों के नेताओं का जमावड़ा लगा था जिसमें सभी विपक्षी दलो ने एकजुट होकर केंद्र की भाजपा सरकार के विरुद्ध अगले लोकसभा चुनाव में उतरने की तैयारी दिखाई थी यह बात भाजपा नेतृत्व के लिए मुश्किल में डालने जैसी थी.और इसके कुछ दिन बाद ही देश के तीन प्रमुख राज्य राजस्थान मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सम्पन्न विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सत्ता हासिल कर ली. इस परिणाम ने एक बार फिर भाजपा नेताओं को बेक फूट पर ला कर खड़ा कर दिया था.
लेकिन महीने भर से कम समय बीतते बीतते देश की राजनीति पूरी तरह से बदल गई है और आज जहां एक तरफ केंद्र की भाजपा सरकार है वहीं विपक्ष पूरी तरह से भी बिखर गया है
शुरुआत की, देश के सबसे बड़े सांसद देने वाला राज्य उत्तर प्रदेश की प्रमुख दल बहुजन समाज पार्टी की नेत्री मायावती ने और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने, इन दोनों नेताओं ने कांग्रेस को कोई तवज्जो नहीं देते हुए उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा का गठबंधन का ऐलान कर दिया और कांग्रेस को इस गठबंधन से सिर्फ अमेठी और रायबरेली की लोकसभा सीट देने की घोषणा की
सपा बसपा नेताओं के अनुसार उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का कोई आधार नहीं है बावजूद इसके कांग्रेस को 2 सीट दी है इसी तरह उड़ीसा से बीजू जनता दल प्रमुख नवीन पटनायक ने लोकसभा चुनाव में बगेर कांग्रेस गठबंधन के अपने दम पर चुनाव में उतरने की घोषणा कर दी. आंध्र प्रदेश के तेलगु देशम पार्टी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू नेवी ने भी यही भूमिका अपनाई. उधर पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने भी लोकसभा चुनाव बिना कांग्रेस के सहयोग से लड़ने की घोषणा की है
आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के नाम पर तेलुगू देशम पार्टी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू जहां रोज आंध्र प्रदेश से दिल्ली तक धरना प्रदर्शन कर रहे हैं वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी का पूरे देश का ध्यान आकर्षित करने वाला कारनामा पिछले दिनों ही देखा गया अपना प्रभाव कम होता देख या फिर नए प्रयोग के तहत कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ने अपनी बहन प्रियंका गांधी को चुनाव प्रचार मैदान में उतारा है.
2 दिन पूर्व उत्तर प्रदेश के लखनऊ में आयोजित रैली को मीडिया में भी जमकर प्रचारित किया गया था लेकिन इसी दौरान उत्तर प्रदेश में समाजवादी के प्रमुख अखिलेश यादव भी सक्रिय हो गए.उनके प्लेन को रोकने और प्रयाग राज में प्रवेश बंदी पर पुरे राज्य में सपाई सक्रिय हो गए और और टीवी समाचार के साथ अखबार की सुर्खियों में प्रियंका गाँधी वढेरा के साथ सपा नेता अखिलेश यादव भी अखबारों की सुर्खियां बटोर रहे है. ऐसे में कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गई है
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के लिए वुधवार को संसद सत्र का अंतिम दिन भी शुभ ही माना जाएगा,विपक्षी समाजवादी पार्टी के संस्थापक रहे मुलायम सिंह यादव ने इस संसद सत्र के अंतिम भाषण में ये साफ़ कहा की नरेन्द्र मोदी जी पुरे देश के साथ मै भी ये चाहता हु कि भारत के प्रधान मंत्री दुबारा नरेन्द्र मोदी ही बने.

