भ्रष्ट कल्याण जीआरपी की देखरेख में चल रहा है यह गोरखधंधा
पिछले काफी समय से कुष्ठ रोगियों और विकलांगों के नाम पर मिलने वाली सुविधाओं के लिए रेलवे के साथ धोखाधड़ी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है जिसमें एक आरोपी को पीआरएस के अधिकारियों ने तो पकड़ लिया लेकिन एफआईआर दर्ज होने के पहले ही वह पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया।
पता हो कि यह घटना कल्याण रेलवे आरक्षण केंद्र की है। जहां 9 दिसंबर को कृष्णा रतन महाले नामक आरोपी कल्याण रेलवे आरक्षण केंद्र पर आया और कुष्ठरोग एवं विकलांगता के प्रमाण पत्र देकर रियायती दर पर 5 टिकिट लिया।
शिकायतकर्ता प्रकाश आंबेकर ने बताया कि उक्त यात्री के उपर शक हुआ तो उसके प्रमाण पत्रों की जांच की गई तो फर्जी साबित हुआ। पीआरएस में डियूटी पर तैनात रूपाली बाविस्कर नामक महिला क्लर्क ने आरक्षण फॉर्म पर अंकित मोबाइल नम्बर पर फोन कर कृष्णा महाले को बुलाया। रू
और आंबेकर सहित रेलवे के अधिकारियों ने जब दस्तावेज की जांच की तो प्राइवेट डाक्टर द्वारा बनाए गए फर्जी प्रमाण पत्र का खुलासा हुआ। सीईआरएस श्री आंबेकर ने आरपीएफ की मदद से उसे पकड़े रखा और कल्याण जीआरपी थाने ले गए लेकिन जीआरपी ने यह कहकर मामले को दर्ज करने से मना कर दिया कि यह मामला महात्मा फुले पुलिस स्टेशन के अधीन है।
जबकि प्रावधानों के अनुसार किसी भी क्षेत्र के मामले किसी भी पुलिस स्टेशन के तहत ज़ीरो नंबर डालकर दर्ज किया जा सकता है और उसके बाद संबंधित पुलिस स्टेशन में स्थानांतरित किया जा सकता है।
आंबेकर और अन्य स्टाफ आरोपी को लेकर कल्याण के महात्मा फुले पुलिस स्टेशन पहुंचे और मौजूद पुलिसकर्मियों को घटना की जानकारी देते हुए बताया तथा मामले को दर्ज करने का आग्रह किए। लेकिन एफआईआर दर्ज होने के पहले ही आरोपी कृष्णा रतन महाले पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। ब
जाता है कि गिरोह के मुखिया कृष्णा ने संदीप सोनवने, राकेश शसाणे, रमेश कांबले और नितीन घोडेश्वर नामक 5 यात्रियों के नाम से कुष्ठरोग और विकलांगता का प्रमाण पत्र देकर कल्याण से जलपाईगुड़ी का टिकट निकाला था।
फिलहाल महात्मा फुले पुलिस धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश में जुटी है। बताया जाता है कि मामले के मुख्य सरगाने की गिरफ्तारी के बाद ही यह पता चल पाएगा कि रेलवे के साथ यह धोखाघड़ी कब से चल रही है और उनका लिंक रेलवे और पुलिस में कहां तक है।
