पांच साल के अपने कार्यकाल में मोदी सरकार ने सड़कों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक का सुधार किया। बिजली को सुदूर गाँवों तक पहुंचाया गया। आवागन के साधनों का विस्तार किया गया। कुछ मामलों में मोदी सरकार की खिल्ली भी उड़ाई गई। जैसे की पकोड़े बेचना। इस मुद्दे पर मोदी सरकार की भावनाओं को विपक्ष समझ ही नहीं पाया। देश के कई ठेले वाले ऐसे हैं जो दिन भर में हज़ारों रुपयों का मुनाफ़ा कमाते हैं। इनका मजाक उड़ाना भी विपक्ष का मुख्य धंधा बन गया था। जिसकी वजह से देश ने विपक्ष को सत्ता सौपना ठीक नहीं समझा।
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अब बात करते हैं मोदी सरकार की दूसरी पारी की चुनौतियों की। विगत पांच वर्षों में किसानों की आत्महत्याओं में कमी नहीं आयी है। इसकी मुख्य वजह साहूकारों से क़र्ज़ लेना और ऊँची कीमतों वाली ब्याज दर ना चुका पाना है। सरकार किसानों के बैंकों वाले क़र्ज़ तो माफ़ कर सकती मगर साहूकारों से लिया हुआ ब्याज वाला क़र्ज़ कैसे माफ़ करेगी ? अपनी दूसरी पारी में मोदी सरकार को साहूकारों पर नकेल कसनी होगी। किसानों को बैंकों से सहज और जल्द क़र्ज़ मिल सके इसकी योजना बनानी होगी और साथ ही साथ क़र्ज़ की रकम सही जगह खर्च हो रही है या नहीं यह भी देखना होगा। दूसरी बार सबसे बड़ा जनादेश मिलने के पश्चात अब मोदी सरकार को देश की अर्थ व्यवस्था पर खासा ध्यान देना होगा। किसी अर्थ शास्त्री के हाथ ही वित्त मंत्रालय सौपना होगा।
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