Social

मालेगांव बम विस्फोट मामले में सभी आरोपी बरी; ‘हिंदू आतंकवाद’ की साजिश बेनकाब – हिंदू जनजागृति समिती

दिनांक: 31 जुलाई 2025

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने मालेगांव बम विस्फोट मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। इस ऐतिहासिक निर्णय के साथ वर्षों से चले आ रहे तथाकथित ‘हिंदू आतंकवाद’ के नैरेटिव को अंतिम रूप से खारिज कर दिया गया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए हिंदू जनजागृति समिति ने इसे न्याय की विजय बताते हुए इस पूरे मामले को एक गंभीर राजनीतिक साजिश बताया है।

“बदला नहीं, न्याय चाहिए” – श्री रमेश शिंदे

हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री रमेश शिंदे ने कहा:
केवल हिंदू होने के कारण देशभक्त व्यक्तियों जैसे साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को वर्षों तक जेल में बंद रखा गया। उनके साथ अमानवीय मानसिक और शारीरिक अत्याचार किए गए। यह केवल कुछ व्यक्तियों पर अन्याय नहीं था, बल्कि पूरे हिंदू समाज को कलंकित करने का षड्यंत्र था।

उन्होंने आगे कहा, “अब जब सच्चाई सामने आ गई है, तो केवल केस बंद कर देना पर्याप्त नहीं है — जिन्होंने यह झूठा नैरेटिव रचा, उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होनी ही चाहिए।

राजनीति से प्रेरित आरोप?

समिति ने याद दिलाया कि तत्कालीन गृहमंत्री सुशीलकुमार शिंदे ने ‘हिंदू आतंकवाद’ शब्द का प्रयोग किया था, जिसे बाद में उन्होंने स्वयं सार्वजनिक रूप से गलती माना। मगर उन्होंने यह शब्द किसके कहने पर उपयोग किया था? इसके पीछे किसकी साजिश थी?

विकिलीक्स द्वारा उजागर केबल्स का हवाला देते हुए श्री शिंदे ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अमेरिकी राजदूत के सामने कहा था कि “भारत में हिंदू आतंकवाद, पाकिस्तान समर्थित इस्लामी आतंकवाद से भी बड़ा खतरा है।” समिति ने इस तरह के झूठे प्रचार में शामिल सभी लोगों के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग की है।

“न्याय मिला, लेकिन संघर्ष अभी बाकी है” – समिति का मत

हिंदू जनजागृति समिति का मानना है कि आरोपितों को निर्दोष सिद्ध करना केवल पहला कदम है।
जिन्होंने जाति, धर्म और राजनीति को मिलाकर हिंदू समाज को बदनाम करने की साजिश की, उन सभी के खिलाफ सख्त कानून कार्रवाई होनी चाहिए। नहीं तो भविष्य में ऐसी साजिशें दोबारा रची जा सकती हैं,” श्री शिंदे ने चेतावनी दी।

इस फैसले से न केवल निर्दोषों को न्याय मिला है, बल्कि धर्म के आधार पर आतंकवाद से जोड़े गए खतरनाक राजनीतिक नैरेटिव पर भी करारा प्रहार हुआ है। तथाकथित ‘भगवा आतंकवाद’ की अवधारणा अब न्यायिक समीक्षा में पूरी तरह धराशायी हो गई है।