दुर्घटनाग्रस्त हो रहे अवैध निर्माणों में मनपा अधिकारी और नगरसेवक ज़िम्मेदार क्यों नहीं ?
(कर्ण हिंदुस्तानी )
उल्हासनगर – अभी हाल ही में उल्हासनगर में मेमसाहेब नामक एक अवैध इमारत का स्लैब गिर जाने से तीन लोगों की मौत हो गई। इस हादसे ने फिर एक बार कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जब कभी ऐसा हादसा होता है , पुलिस और मनपा प्रशासन इमारत बनाने वाले ठेकेदार पर मामला दर्ज़ कर चुप हो जातें हैं। जबकि हर अवैध निर्माण के समय स्थानीय नगरसेवक और मनपा के अधिकारियों को नज़राने के रूप में बड़ी रकम दी जाती है। फिर भी कभी भी दुर्घटना होने वाले वार्ड के नगरसेवक और वार्ड अधिकारी को हादसे के लिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जाता है। और उनपर किसी भी आरोप का अपराधिक मामला भी नही दर्ज किया जाता है.

ताज़ा उदाहरण उल्हासनगर मनपा क्षेत्र के हादसे को ही लें तो रिश्वत के मामले में दोषी पाए गए गणेश शिंपी को पदोन्नति देकर मनपा आयुक्त ने वार्ड अधिकारी बना दिया। अब शहर में धड़ल्ले से अवैध निर्माण हो रहे हैं और गणेश शिंपी अपनी झोली भर रहा है। उल्हासनगर मनपा आयुक्त अच्युत हांगे किसी भी प्रकार की शिकायत पर ध्यान नहीं देते। शहर के हर जागरूक नागरिक को ब्लैक मेलर करार दिया जाता है। जब भी उल्हासनगर में अवैध निर्माण ध्वस्त होते हैं। सांसद , विधायक और नगरसेवक सहित मनपा आयुक्त तथा वार्ड अधिकारी आंसू बहाने पहुँच जाते हैं। मगर कभी भी मनपा ने नगरसेवक अथवा अपने वार्ड अधिकारी को कठघरे में खड़ा नहीं किया है।

ऐसा क्यों होता है ? गणेश शिम्पी जैसे भ्र्ष्ट अधिकारी को आखिर क्यों अभय दान दिया जाता है ? स्थानीय नगरसेवक को किसकी शह मिलती है ? सभी जानते हैं कि स्थानीय नगरसेवक और वार्ड अधिकारी की मदद के बिना कहीं पर अवैध निर्माण के लिए एक ईंट भी नहीं लगाईं जा सकती। फिर नगरसेवक और वार्ड अधिकारी पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की जाती ? आज हमने बात सिर्फ उल्हासनगर मनपा क्षेत्र की की है , जबकि सभी मनपा क्षेत्रों की यही हालत है। इस तरह के हादसों के लिए अवैध निर्माणकर्ता को दोषी मानकर मामला रफादफा कर दिया जाता है। आखिर ऐसा क्यों ?

