कल्याण:
राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में डांस बारों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का विधेयक लाने के फैसले के बाद से ही कल्याण-डोंबिवली क्षेत्र, विशेषकर कल्याण-शील रोड के ग्रामीण इलाकों में खुशी और उत्सव का माहौल है। सालों से डांस बारों के आतंक और अश्लीलता का दंश झेल रहे स्थानीय नागरिकों ने सरकार के इस कदम को “देर आए, दुरुस्त आए” बताते हुए इसका जोरदार स्वागत किया है।
रात होते ही ‘रेड लाइट एरिया’ में तब्दील हो जाते थे गांव
कल्याण-शील रोड पर स्थित पिसवली, गोलवली, दावड़ी नाका, सोनारपाड़ा, मानपाड़ा और काटई जैसे दर्जनों गांवों के मूल निवासी पिछले कई वर्षों से नरक से भी बदतर जिंदगी जीने को मजबूर थे। इन गांवों में धड़ल्ले से चल रहे अवैध डांस बारों के कारण स्थिति इतनी भयावह हो चुकी थी कि रात होते ही इन रिहायशी इलाकों को लोग परोक्ष रूप से ‘रेड लाइट एरिया’ के रूप में देखने लगे थे।
इस सामाजिक कलंक के कारण इन गांवों की छवि को गहरा धक्का लगा था, जिसका सीधा असर यहां के पारिवारिक और सामाजिक ताने-बाने पर पड़ रहा था। स्थिति यह हो गई थी कि अब इन गांवों में बाहर से शादी-ब्याह के रिश्ते आने भी बंद हो गए थे।
खौफ के साए में महिलाएं, युवा पीढ़ी हो रही थी बर्बाद
इन डांस बारों का सबसे बुरा और दर्दनाक असर स्थानीय महिलाओं और युवाओं पर पड़ा है। क्षेत्र की महिलाएं और युवतियां शाम को 7-8 बजे के बाद सड़कों पर निकलने या घर से बाहर कदम रखने में भी कतराने लगी थीं। चारों तरफ असुरक्षा का माहौल था।
वहीं, दूसरी ओर गांवों की नई उम्र की युवा पीढ़ी इन बारों के प्रभाव में आकर तेजी से शराबखोरी और नशे की लत का शिकार हो रही थी, जिससे कई हंसते-खेलते परिवार पूरी तरह बर्बाद हो गए।
“स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह फैसला सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि हमारी माताओं-बहनों की सुरक्षा और युवाओं के भविष्य को बचाने वाला संजीवनी बूटी की तरह है।”
पुलिस की संदेहास्पद भूमिका और बढ़ता अपराध ग्राफ
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इन डांस बार संचालकों को स्थानीय पुलिस का पूरा संरक्षण और आजादी मिली हुई थी। मानपाड़ा पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आने वाले इन इलाकों में आपराधिक घटनाएं चरम पर पहुंच चुकी थीं।
डांस बारों में आने वाले शराबी ग्राहक और असामाजिक तत्व देर रात भारी मात्रा में शराब पीने के बाद सड़कों पर खुलेआम हुल्लड़बाजी और मारपीट करते थे। हद तो तब हो गई जब इस क्षेत्र में कई संदिग्ध हत्याओं के मामलों को भी स्थानीय पुलिस द्वारा महज ‘अकस्मात मृत्यु’ (Accidental Death) के रूप में दर्ज कर रफा-दफा कर दिया गया।
जनता ने किया सरकार के फैसले का स्वागत
राज्य सरकार के इस कड़े रुख और विधेयक लाने के निर्णय से अब इन गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है। नागरिकों का मानना है कि इस कानून के सख्ती से लागू होने के बाद कल्याण-शील रोड के गांवों को इस सामाजिक बुराई से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी और क्षेत्र में एक बार फिर शांति, सुरक्षा और गौरव का माहौल लौटेगा।
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