टिकट जांच कर्मचारीयों पर हमला रेल अधिकारियों की देन।
मध्य रेलवे के स्टेशनो पर टिकट जांच कर्मचारीयों पर लगातार हमले बढ़ रहे है। अभी हफ्ते भर पहले कल्याण से सटे अंबिवली रेलवे स्टेशन पर टिकट जांच कर्मचारी पर हमला हुआ। जिससे मध्य रेलवे के मुबंई मंडल मे टिकट जांच कर्मचारीयों मे एक बार फिर दहशत का माहौल है।
लगातार प्राणधातक हमले होने के वाबजुद रेलवे प्रशासन अभी भी टाल मटोल कि नीति अपना रखा है वही टिकट जांच कर्मियों के लिए यह चिंता का बिषय बना हुआ है,टिकट जांच कर्मचारीयों ने इन हमलों के लिए रेल अधिकारियों की मनमानी को जिम्मेदार थराय है। ।
रेल टिकट कर्मी सूत्रों के अनुसार टिकट जांच कर्मचारीयों पर हमला का मुख्य कारण, रेलवे प्रशासन के अधिकारियों द्वारा स्टेशन पर अवैध यात्रियों से जुर्माना वसूली का हर वर्ष बढ़े हुए टारगेट थोपे जाने को माना है । इससे हर टिकट जांच कर्मचारी तनाव मे रहता है क्योंकि टारगेट नही पूरी होने पर उसे डयूटी खत्म करने के बाद सम्बंधित अधिकारी को यह बताना पड़ता है कि आज उसने टारगेट नही पूरा किया है।
और ,यदि निर्धारित संख्या मे रसीद नही बन पाती है यानि टारगेट पूरा नहीं हुआ हो तो उसे वरिष्ठ रेलवे अधिकारी तरह तरह से प्रताड़ित करते है, रेल टिकट कर्मी को ऐसी जगह नियुक्ति करने की थमकी दी जाती है, जहां टिकट जांच करने का मतलब, अपनी जान जोखिम मे डालने जैसा है।
रेल प्रशासन को यदि इन टिकट जाँच कर्मचारियों को हमले से बचाना है तो जबरदस्ती थोपे गये टारगेट मे ढील देनी होगी। इसके साथ टिकट जांच कर्मियों को ड्यूटी के दौरान आवश्यक सुरक्षा देने होगी ।
अनेक टिकट जांच कर्मचारीयों के अनुसार मध्य रेलवे के कुछ प्रमुख स्टेशनो को छोड़ दे तो ज्यादातर स्टेशन पर आने और जाने के लिए चोर दरवाजे है । जिससे बिना टिकट यात्री बेधड़क यात्रा करते है।
अगर इन स्टेशनो पर कोई टिकट जांच कर्मचारीयों हिम्मत दिखाकर विना टिकट यात्रियों की जांच करता है तो इन बेटिकट यात्रियों द्वारा दुर्व्यवहार और मारपीट होना स्वभाविक है।
क्योंकि यात्रियों को पता रहता है कि टिकट जांच कर्मचारीयों से इन जगहों पर दुर्व्यवहार या मारपीट करने के वाबजुद पकड़े जाने का डर नही रहता है। मध्य रेलवे को इन चोर दरवाजे को भी तत्काल रूप से बंद करने कि आवश्यकता है।
रेलवे प्रशासन को टिकट जांच कर्मचारीयों कि इन परेशानियों को दूर करने के साथ रेल यात्रियों को भी शिक्षित करना पडे़गा की यदि कर्मचारियों से कोई शिकायत है तो उसकी जानकारी सम्बंधित अधिकारी को दे. जिससे उसकी समस्या का निराकरण किया जा सके.
ना की वह स्वंय मारपीट करके शिकायत दूर करने का प्रयास करे,ओर प्रशासन को भी रेल कर्मचारियों पर हमला करने वाले यात्री पर कठोर कार्यबाही करे जिससे अन्य यात्री भी ऐसा करने का दुस्साहस ना कर सके।

