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युवाओं में बढ़ती हृदय रोग चिंताजनक – राज्यपाल बैस

मुंबई, दि. 7
‘कार्डियक इमेजिंग’ जैसी अत्याधुनिक तकनीकों ने हृदय रोग के निदान और उपचार में क्रांति ला दी है, जिससे लाखों लोगों की जान बचाई गई है। हालांकि, 20 से 30 साल के युवाओं में दिल की बीमारी चिंता का विषय है। राज्यपाल रमेश बैस ने आज यहां कहा कि इसे रोकने के लिए हृदय रोग विशेषज्ञों को समाज का मार्गदर्शन करना चाहिए।

गवर्नर बैस की उपस्थिति में सांता क्रूज़ में ‘कार्डियक इमेजिंग और क्लिनिकल कार्डियोलॉजी’ पर तीसरे विश्व सम्मेलन का उद्घाटन किया गया, वह उस समय बोल रहे थे।

परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड के अध्यक्ष और परमाणु वैज्ञानिक दिनेश कुमार शुक्ला, कार्डियक इमेजिंग वर्ल्ड कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. सीएन मंजूनाथ, वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ कार्डियक इमेजिंग एंड क्लिनिकल कार्डियोलॉजी के अध्यक्ष डॉ. जीएन महापात्र, श्री अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, इंदौर के संस्थापक डॉ. विनोद भंडारी आदि उपस्थित थे।

इमेजिंग जैसी उन्नत प्रौद्योगिकी प्रक्रियाएं सामान्य रोगी के लिए महंगी हैं। ऐसे परीक्षणों के लिए आवश्यक चिकित्सा उपकरण अधिकतर विदेशों में निर्मित होते हैं और महंगे होते हैं। इसलिए, यदि देश में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों का निर्माण किया जाता है, तो इमेजिंग परीक्षणों की लागत कम हो जाएगी, गवर्नर बैस ने कहा।

हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कैंसर और हाल ही में स्क्रीन की लत के साथ जीवनशैली संबंधी बीमारियों के मामले में भारत की स्थिति गंभीर है। हृदय रोग से होने वाली सभी मौतों में से एक-तिहाई चालीस वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में होती हैं। विश्व कांग्रेस के अध्यक्ष और हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सीआर मंजूनाथ ने इस अवसर पर कहा कि यह बात सामने आई है कि हृदय विकारों की बढ़ती संख्या के पीछे वायु प्रदूषण भी एक कारण है।

उन्होंने बच्चों का स्कूल सुबह 10:30 बजे से शुरू करने की अपील की ताकि बच्चों को अच्छी नींद आए और बच्चों को तैयार करते समय माता-पिता का तनाव भी कम हो.

इस अवसर पर राज्यपाल द्वारा ‘कार्डियक इमेजिंग अपडेट-2023’ पुस्तक एवं सम्मेलन की स्मारिका का विमोचन किया गया।

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