प्रियंका वाढेरा गाँधी, नयी बोतल – पुरानी शराब
(कर्ण हिन्दुस्तानी )
आम जनमानस की नज़र में डूबती जा रही कांग्रेस को उबारने के लिए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी ने अपनी बहन प्रियंका गाँधी को आखिरकार राजनीती में उतार ही दिया। प्रियंका को सक्रिय राजनीती में उतारने के बाद यह प्रचार किया जा रहा है कि प्रियंका वाढरा गाँधी शक्ल सुरत से इंदिरा गाँधी जैसी दिखती है। आखिर पोती की शक्ल अगर दादी से मिलती है तो इसमें कौन सी नई बात है ? लेकिन पिछले अनेक लोकसभा के साथ उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनावो में प्रियंका द्वारा धुँआ धार प्रचार करने के बावजूद परिणाम नकारत्मक आने से एक बात तो साफ हो गयी है की प्रियंका की शक्ल शुरत भले ही स्व इंदिरा गाँधी से मिलती जुलती है लेकिन योग्यता के आकलन में प्रियंका के लक्षण कही से भी स्व इंदिरा गांधी के योग्यता के पाँव के धुल के बराबर नही दिखते
सिर्फ शक्ल मिलने से यदि किसी की योग्यता का अंदाज़ा लगाया जा रहा हो तो उन्हें महाराष्ट्र के ठाकरे परिवार की ओर देख लेना चाहिए। राज ठाकरे की शक्ल हूबहू बाला साहेब ठाकरे से मिलती है। यहां तक कि राज ठाकरे की आवाज़ और बोलने का ढंग भी बाला साहेब जैसा ही है। मगर राज ठाकरे बाला साहेब जैसी ऊंचाई कभी हासिल नहीं कर पाए।
उसी तरह जिनको प्रियंका में इंदिरा गाँधी नज़र आती है उन्हें पता होना चाहिए कि इंदिरा गाँधी जैसी शक्ल सूरत वाले कई लोग इस धरती पर होंगे मगर इंदिरा एक ही हुई हैं और दुसरी इंदिरा हो भी नहीं सकती। हाँ इतना ज़रूर है कि प्रियंका भी अपनी दादी और अपने पिता की तरह गरीबी हटाओ का नारा लगाती घूमेंगी। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी ने तो गरीबों को हर माह एक निश्चित रकम देने की घोषणा भी कर दी है। यानी कि कांग्रेस ने नई बोतल में पुरानी शराब भरने की कोशिश की है।
जबकि सभी जानते हैं कि प्रियंका यदि राजनीती में सक्रिय होने जा रही है तो वह अपनी माँ सोनिया गाँधी की जगह से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी भी कर के आयी हैं। प्रियंका के राजनीती में आने से यह संकेत भी मिलता है कि राहुल गाँधी कांग्रेस की डूबती नैया को बचाने में पूर्णतया असफल रहे हैं। गाँधी घराने के कुत्ते की पूँछ का निचला भाग तक सहलाने के कार्य को अपना भाग्य समझने वाले कांग्रेस के बाकी नेतागण अब खुद को तरोताज़ा बता रहे हैं। जबकि सभी जानते हैं कि मौजूदा समय के युवा वर्ग ने स्व इंदिरा गाँधी को प्रत्यक्ष रूप से देखा नहीं है।
स्व इंदिरा गाँधी ने अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दो फाड़ करके इंदिरा कांग्रेस को प्रचलित किया। इंदिरा ने अपने हक़ में नारा लगवाया , इंदिरा इज इन्डिया – इंडिया इज इंदिरा , इंदिरा के राज में एक मंत्री बाकी सारे संतरी का जुमला भी हिट था। देश के विभिन्न बैंकों को अपने हिसाब से चलवाने वाली स्व इंदिरा गाँधी ने देश की अर्थ व्यवस्था को चौपट करने में कोई कोताही नहीं बरती थी। प्रियंका गाँधी में यदि किसी को स्व इंदिरा गाँधी दिखती है तो मेरी नज़र में उसको अपनी आँखों की जांच करवानी चाहिए। क्योंकि स्व इंदिरा गाँधी में थोड़ी सी तो देश भक्ति थी मगर प्रियंका ? अपने राजनीतिक फायदे के लिए राजनीती में पदार्पण कर चुकीं हैं। प्रियंका के पति के हाथ में कब सरकारी कंगन पहना दिए जाएंगे कोई नहीं जानता। १९८४ में स्व इंदिरा गाँधी की ह्त्या के बाद से देश युवाओं का नया वोट बैंक तैयार हुआ है जो मौजूदा कांग्रेस को जानता है जो बदनाम के सिवा कुछ नहीं है। ऐसे में प्रियंका को इंदिरा बता कर पेश करना कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी की मंद बुद्धि को ही दर्शाता है।

