कल्याण- कल्याण पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में सामान्य जन सुविधाओं का अभाव स्पष्ट नजर आता है। स्थानीय विधायक विश्वनाथ भोईर चाहे खुद को कार्य सम्राट मानते होंगे । मगर सच्चाई सबके सामने है। स्टेशन से उतरते ही समस्याओं से रूबरू होना कल्याण पश्चिम के मतदाताओं का जीवन बन चुका है।
कल्याण पश्चिम विधानसभा: सचिन बासरे , विश्वनाथ भोईर और वरूण पाटिल में त्रिकोणीय टक्कर
ऐसे में आज तक मौजूदा विधायक विश्वनाथ भोईर कभी भी जनता दरबार करते नजर नहीं आए। यातायात समस्या, स्टेशन से बाहर निकलने पर रिक्षा चालकों की जबरन लगायी गयी कतार , फेरीवालो का फुटपाथ पर कब्जा, बीच सडक पर होटल मालिकों द्वारा फेंके जाने वाला कचरा जैसी समस्याओं का शहर बने कल्याण पश्चिम को सही मायने में कर्तव्यदक्ष विधायक चाहिए। मगर ऐसा कहीं नहीं दिखता है।
पांच सालों के अपने कार्यकाल में विश्वनाथ भोईर ने कोई खास प्रकल्प भी कल्याण पश्चिम के लिए लाने की कोशिश नहीं की । जबकि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के विधानसभा सह संगठक रूपेश भोईर ने शहर की हर समस्या को समय पर उठाया है और समस्याओं की खबरें भी समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रहीं । मगर एक बार भी विश्वनाथ भोईर ने किसी समस्या पर ध्यान नहीं दिया।
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अब बात करें विधानसभा चुनावों के मौजूदा प्रचार कार्य की तो विश्वनाथ भोईर ने जोर लगाया हुआ है। शिवसेना (उबाठा) के अधिकृत प्रत्याशी सचिन दिलीप बासरे का मौजूदा समय में प्रचार कार्य काफी धीमी गति से चल रहा है।
शिवसेना (उबाठा) के प्रचार प्रमुख जयेश वाणी खुद के प्रत्याशी को गरीब बताकर दिल जीतना चाहते हैं । मगर आज के युग में चुनाव भावनाओं के सहारे नहीं जीता जाता यह बात उद्धव ठाकरे के प्रत्याशी को पता होनी चाहिए।
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बाकी सचिन बासरे एक अभ्यासू प्रत्याशी हैं इस बात को कोई नकार नहीं सकता । मगर बासरे को प्रचार की गति बढाने की जरूरत है। कल्याण पश्चिम के त्रिकोणीय मुकाबले में तिसरा कोण भाजपा से बगावत कर निर्दलीय नामांकन भरने वाले वरूण पाटिल को भाजपा ने ही छला है और इसका एहसास वरूण पाटिल को भी है।
वरूण पाटिल अपने बल पर जीत हासिल करने की कोशिश कर रहै हैं । इस चुनावी जंग में मनसे के प्रत्याशी उल्हास भोईर भी हैं मगर उल्हास भोईर को चाहने वाले सीमित संख्या में ही हैं । उल्हास भोईर का प्रचार कार्य तो नजर ही नहीं आ रहा है।
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कुल मिलाकर कल्याण पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में समस्याओं का अंबार है मगर चुनावी बयार है। इसमें किस दल का ऊंट किस करवट बैठेगा यह अगले कुछ दिनों में स्पष्ट हो जाएगा।
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