२७ गाँवों के अवैध निर्माणों के चोरी छुपे किये गए रजिस्ट्रेशन की होगी जांच।खलबली !
(कर्ण हिन्दुस्तानी)
डोम्बिवली – मनपा से रूठ कर चुनावों का बहिष्कार करने वाले और बाद में मनपा में शामिल होने वाले २७ गाँवों के २५० भवन निर्माताओं के निर्माण की जांच किये जाने से हड़कंप मच गया है। जिला अधिकारी के माध्यम से यह जांच पुलिस को सौंपी गई है। इस जांच का सर्वदलीय संघर्ष समिति ने कड़ा विरोध किया है।
ज्ञात हो कल्याण डोम्बिवली मनपा के वर्ष १९९० के चुनाव से ही यहाँ के २७ गावो ने कल्याण मनपा में शामिल नही होने की मांग रखते हुए मनपा चुनाव का वहिष्कार किया था.लगातार अनेक चुनाव वहिष्कार के कारण राज्य सरकार ने इन गावो को मनपा से अलग करते हुए यहाँ ग्राम पंचायत शासन की मंजूरी दे दी थी.लेकिन पिछले मनपा चुनाव के पहले २७ गावो के सर्व पक्षीय ग्रामीण संघर्ष समिति को विश्वास में लेकर राज्य सरकार ने इन २७ गावो को कल्याण मनपा में शामिल करते हुए चुनाव भी करवाए थे.
लगातार १० – १५ वर्ष इन गावो में ग्राम पंचायत शासन होने और फिर मनपा में शामिल होने के बाद कल्याण मनपा का इस गावो में विकास का कोई कार्यक्रम नही तय हो पाया है,इन गावो में पेयजल,साफ़ सफाई,नालो का नियोजन जैसी गंभीर समस्या दिन व् दिन बढती ही जारही है.इस के साथ इन गावो में सरकारी नियमो को ताक पर रख कर धड़ल्ले से हो रहे अवैध निर्माण भी इन्ही गंभीर समस्याओं में है.बिना सही नियोजन से निरंतर हो रहे अवैध निर्माण से लोगो को अभी से ही अनेक समस्याओ का सामना करना पड रहा है.
कल्याण मनपा में इन २७ गावो के शामिल हुए साढे तीन साल हो गए लेकिन आज भी काम शुरू करने वाले ज्यादातर भवन निर्माता पैसे देकर चार पांच साल पुरानी तारीख में जिलाधिकारी कार्यालय का परमिशन निकाल लेता है.जबकि २७ गावो के कल्याण मनपा में शामिल होने के बाद सभी परमिशन रद्दकर कर कल्याण मनपा द्वारा दिए गए निर्माण के परमिशन को ही वैध माना जाना चाहिए.
और इसी धांधली के कारण इन २७ गावो में हजारो अवैध निर्माण बन गए और धडल्ले से जारी भी है.कल्याण मनपा में इन २७ गावो को शामिल करने के बाद राज्य सरकार के पास इन गावो में अवैध निर्माण होने की लगातार शिकायते मिली इसी कारण राज्य के महसूल मंत्री चंद्रकांत दादा पाटिल ने इन गावो के अवैध रूप से निर्मित घरो के बिक्री रजिस्ट्रेशन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था.
और कुछ दिन पूर्व २७ गावो के नेताओं की लगातार मांग के बाद राज्य सरकार ने इन गावो के निर्माणों के रजिस्ट्रेशन को कुछ शर्तो पर मंजूरी दी है.जिसमे निर्माण की वैधता की मंजूरी के कागजात दिए जाने के बाद ही रजिस्ट्रेशन किये जाने का सख्त निर्देश यहाँ के उपनिबंधक कार्यालय को दिया गया है.
लेकिन एक माह पूर्व यहाँ के कल्याण पूर्व से भाजपा विधायक गणपत गायकवाड ने राज्य के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणविस और महसूल मंत्री चंद्रकांत दादा पाटिल को लिखित शिकायात की थी.जिसमे यह साफ़ जिक्र था की इन २७ गावो में सरकार के प्रतिबंध के बावजूद धडल्ले से रजिस्ट्रेशन जारी है कुछ लोग भ्रष्ट्राचार कर अपने हिसाब किताब से यहाँ के उप निबंधक कार्यालय के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिली भगत से रजिस्ट्रेशन करवा रहे है. और रजिस्ट्रेशन के दौरान सरकार द्वारा निर्देशित आवश्यक कागजपत्र भी नही लिया जा रहा है.
राज्य सरकार ने विधायक गनपत गायकवाड की शिकायात पर इसकी जाँच शुरू करवा दी है. ठाणे जिलाधिअकारी कार्यालय सूत्रों के अनुसार इसं २७ गावो में २५० से अधिक भवन निर्माताओ ने अपने हजारो निर्मित घरो को प्रतिबंध के बावजूद रजिस्ट्रेशन करवा कर ग्राहकों को बेचा है.अब जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा इन्ही २५० भवन निर्माताओं की जांच की जा रही है और उनसे रजिस्ट्रेशन के दौरान दिए गए कागजपत्रो की भी जांच की जा रही है.
उल्लेखनीय है कि यहाँ के लगभग २५० भवननिर्माताओं ने इन दलालों के मार्फ़त से अपने निर्माणों को, घरो के इच्छुको को बेच कर इसे उप निबंधक कार्यालय में पंजीकृत करवा लिया है। यह पंजीकरण करते समय किन कागज़ों को पेश किया गया है। इसकी जांच जिलाधिकारी के माध्यम से की जा रही है। जिससे लगभग २५० भवननिर्माताओं में खलबली मची हुई है। बीते मंगलवार मानपाडा के शिवमंदिर में हुई संघर्ष समिति की बैठक में भवननिर्माता भास्कर पाटिल ने इस मुद्दे को सबके सामने रखा। मानपाडा पुलिस के सूत्रों के अनुसार कुछ भवननिर्माताओं को तलब भी किया जा चुका है।

