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विशेष परिसंवाद: ‘सीजेपी’ आंदोलन की आड़ में पनप रहे वामपंथियों के अर्बन नक्सलवाद को नाकाम करें – एडवोकेट सत्येंद्र मुले

पुणे:
“लोकतंत्र की मूल अवधारणा हिंदू धर्म ने ही दुनिया को दी है। भारत एक मुक्त विचारों वाला देश होने के बावजूद वामपंथी विचारधारा देश की प्रगति में लगातार बाधाएं उत्पन्न कर रही है। ‘अवॉर्ड वापसी गैंग’, ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ और ‘किसान आंदोलनों’ की आड़ में न्यायपालिका, सेना, मीडिया और शिक्षा व्यवस्था जैसे लोकतंत्र के मुख्य स्तंभों पर सुनियोजित हमले किए जा रहे हैं। इस खतरनाक षड्यंत्र को नाकाम करने के लिए युवा पीढ़ी को वास्तविक इतिहास का बोध कराना और वैचारिक स्तर पर सशक्त बनाना आवश्यक है। आने वाले समय में केवल सरकार पर निर्भर न रहकर देव, देश और धर्म की रक्षा के लिए युवाओं को अपना योगदान देना चाहिए,” ऐसा प्रतिपादन मुंबई उच्च न्यायालय के एडवोकेट सत्येंद्र मुले ने किया।

सनातन संस्था की ओर से 20 अगस्त को पुणे के माधव सदाशिव गोलवलकर गुरुजी विद्यालय स्थित गणेश सभागार में ‘सीजेपी आंदोलन में अर्बन नक्सलवाद?’ विषय पर विशेष परिसंवाद का आयोजन किया गया था। वह इसी कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस परिसंवाद में 300 से अधिक लोग उपस्थित थे। सामाजिक एवं राजनीतिक विश्लेषक श्री सर्वेश मेहंदले ने वक्ताओं से संवाद स्थापित करते हुए अर्बन नक्सलवाद के विभिन्न पहलुओं को उजागर किया।

‘दिमागी नक्सलवाद’ भारत को लगा वैचारिक कैंसर

सनातन संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री अभय वर्तक ने प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस के संबोधन का संदर्भ देते हुए कहा, “प्रधानमंत्री ने ‘दिमागी नक्सलवाद से सावधान रहें’ की चेतावनी देकर देश को अत्यंत महत्वपूर्ण संदेश दिया है। साम्यवाद और अर्बन नक्सलवाद भारतीयता को लगा एक मानसिक कैंसर है। इस बीमारी को दूर करने के लिए वैचारिक और बौद्धिक स्तर पर शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) करनी होगी। ‘जेन-जी’ (Gen-Z) पीढ़ी के सामने साम्यवादियों का असली चेहरा लाना और समाजवादियों के दोहरे रवैये को उजागर करना हमारा प्राथमिक कर्तव्य है।”

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‘सीजेपी’ आंदोलन के पीछे विदेशी फंडिंग और वामपंथी संगठनों की साजिश

सामाजिक एवं राजनीतिक विश्लेषक श्री सर्वेश मेहंदले ने आंदोलन से जुड़े तथ्य सामने रखते हुए कहा, “सोनम वांगचुक के नाम पर 300 नहीं, बल्कि केवल एक ही पेटेंट है; इसके अलावा उनकी संस्था ‘सेकमोल’ का ‘एफसीआरए’ (FCRA) लाइसेंस भी सरकार द्वारा रद्द कर दिया गया है। सीजेपी आंदोलन को ‘आइसा’ (AISA), ‘एसएफआई’ (SFI) और कुछ ईसाई मिशनरी संगठनों का समर्थन प्राप्त था तथा विदेशी फंडिंग से जुड़े कड़े कानूनों में बदलाव का विरोध करना ही इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य था।”

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14 हजार से अधिक निर्दोषों की हत्याओं पर प्रगतिशील चुप क्यों?

हिंदू विधिज्ञ परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट वीरेंद्र इचलकरंजीकर ने वीडियो संदेश के माध्यम से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “गांधी हत्या के बाद देश में केवल चार प्रगतिशील विचारकों की हत्या होने का भ्रम फैलाया जाता है; लेकिन नक्सलियों द्वारा मारे गए 14 हजार से अधिक निर्दोष लोगों की मौतों पर ये अर्बन नक्सली पूरी तरह मौन साधे रहते हैं। इस षड्यंत्र को विफल करने के लिए सभी को सक्रिय होना होगा।”