प्रदूषण के नाम पर सिर्फ गणेशोत्सव ही नहीं बल्कि कई हिंदू त्योहारों पर प्रतिबंध लगाने की साजिश- वकील सतीश देशपांडे का दावा
मुंबई, दि. 25
गोदावरी, यमुना आदि अनेक नदियों के बारे में स्वयं सरकार द्वारा दी गई रिपोर्टों से स्पष्ट है कि प्रदूषण बूचड़खानों और कारखानों से होता है; लेकिन गणेशोत्सव से होने वाले प्रदूषण के बारे में किसी के पास कोई आधिकारिक जानकारी या आंकड़े नहीं हैं. तो फिर किस आधार पर यह कहा जाता है कि गणेश प्रतिमा के विसर्जन से प्रदूषण होता है? इतिहास और संस्कृति के विद्वान, अधिवक्ता सतीश देशपांडे ने हाल ही में कहा कि यह न केवल गणेशोत्सव, बल्कि सभी हिंदू त्योहारों पर विभिन्न प्रतिबंध लगाने की साजिश है।
वह हिंदू जनजागृति समिति द्वारा आयोजित ‘क्या गणेश उत्सव जल प्रदूषण का कारण बनता है?’ विषय पर एक विशेष ऑनलाइन संवाद में बोल रहे थे।
देशपांडे ने यह भी अपील की कि हिंदुओं को अपनी आवाज उठानी चाहिए और इस तथ्य के बारे में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ानी चाहिए कि गणेश मूर्ति के विसर्जन से कोई प्रदूषण नहीं होता है।
कोल्हापुर में ‘हिंदू एकता आंदोलन’ के जिला अध्यक्ष दीपक देसाई ने कहा, हिंदू धर्म में परंपरा है कि गणेश मूर्ति को बहते पानी में विसर्जित किया जाना चाहिए; लेकिन आज पुलिस और प्रशासन गणेश प्रतिमा को बहते पानी में विसर्जित करने का सख्त विरोध कर रहा है. यह विरोध किस आधार पर, किस न्यायालय के आदेश के अनुसार किया गया है? इसका पुलिस-प्रशासन के पास कोई माकूल जवाब नहीं है। कोल्हापुर की पंचगंगा नदी में छह से सात नहरों और कारखानों का पानी छोड़ा जाता है, जिस पर प्रशासन ध्यान नहीं देता; लेकिन जब गणेशोत्सव आता है तो प्रदूषण के नाम पर जाग उठते हैं। यह सब हिंदुओं के रीति-रिवाजों और परंपराओं को रोकने के लिए किया जा रहा है।’
तथाकथित पर्यावरणविद्, वैज्ञानिक, अंधविश्वास निर्मूलन समिति यह भ्रम पैदा कर रहे हैं कि गणेशोत्सव के दौरान प्रदूषण होता है। मार्च 2023 में महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रकाशित एक पुस्तिका में, मुंबई में मीठी नदी, नागपुर में कन्हान नदी, पुणे में मुला-मुथा नदियों को सबसे हानिकारक प्रदूषित नदियों के रूप में उल्लेख किया गया था। मार्च में गणेशोत्सव नहीं हुआ तो यह कैसा प्रदूषण? जो वैज्ञानिक फैक्ट्रियों और बूचड़खानों से होने वाले प्रदूषण पर आवाज नहीं उठाते, वही सेलिब्रिटी गणेशोत्सव के दौरान प्रदूषण पर बात करते नजर आते हैं. क्या उन्होंने कारखानों और बूचड़खानों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए कुछ किया है? क्या सरकार आंकड़ों के साथ बताएगी कि कृत्रिम झील बनने के बाद पिछले दस, बारह वर्षों में कितना प्रदूषण कम हुआ है? ऐसे सवाल हिंदू जनजागृति समिति के मुंबई प्रवक्ता सतीश कोचरेकर ने उठाए.

