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शशिधर की कविताएं मानवीय मूल्यों की प्रतिष्ठा करती हैं- ऋषिकुमार मिश्र

“साहित्य समाज का मार्गदर्शन करता है, तो समाज भी साहित्य को सही दिशा में गति देता है। दोनों एक-दूसरे की विकृति को सुकृति में बदलने में सहायता करतें हैं।” यह बात अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री ऋषि कुमार मिश्र ने कल्याण के अग्रवाल कालेज में आयोजित शशिधर रामजी त्रिपाठी के काव्यसंग्रह “ऋतम्भरा” पुस्तक लोकार्पण समारोह में कहा।

शशिधर रामजी त्रिपाठी के काव्यसंग्रह “ऋतम्भरा” का लोकार्पण करते हुए ऋषि कुमार मिश्र जी ने आगे कहा कि त्रिपाठी जी कविताएं वर्तमान समय मे उन मानवीय मूल्यों की प्रतिष्ठा करती हैं, जो विगत कुछ दशकों से साहित्य से गायब हो रही थीं।

पुस्तक समीक्षा पर बोलते हुए सोमैया विद्यापीठ के पूर्व अधिष्ठाता प्रो. सतीश पाण्डेय ने त्रिपाठी जी की कविताओं को कर्म, संवेदना, मूल्य और अध्यात्म का संगम बताया और आधुनिक साहित्य में छंदबद्ध और गेय कविता के युग का पुनरागमन कहा।

समारोह की अध्यक्षता कर रहे समाजसेवी और शिक्षाविद डा. आर.बी.सिंह ने ऋतंभरा में संकलित कविताओं को समाज का मार्गदर्शन करने वाले साहित्य की श्रेणी में रखा और कहा कि इन कविताओं से पाठक एक जुड़ाव का अनुभव करते हैं। यही कवि की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के सदस्य डा. दिनेश प्रताप सिंह ने अपने प्रस्ताविक संबोधन में कहा कि वही साहित्य युगानुकूल होता है जो समाज की उंगली पकड़कर चलता है। वह समाज को सही दिशा का बोध कराता है और स्वयं समाज से गति प्राप्त करता है। जो साहित्य समाज और देशकाल को बिना समझे लिखा जाता है, वह स्वीकार्य नहीं होता है और बहुत जल्दी अपनी प्रतिष्ठा खो देता है।

लोकार्पण समारोह में अपना मंतव्य रखते हुए कवि श्री शशिधर रामजी त्रिपाठी ने कहा कि ये सारी कविताएं उनको बालपन से मिले पारिवारिक संस्कारों, साहित्यकारों की संगति, काशी की संस्कृति और समाज के मूल्यों से प्रभावित हैं। ऋतम्भरा कविता संग्रह में कुल अड़तालीस कविताएं संकलित हैं। इसका प्रकाशन महाराष्ट्र साहित्य अकादमी के आर्थिक सहयोग से हुआ है।

समारोह में कवि सम्मेलन भी आयोजित किया गया था, जिसमें सत्यदेव विजय, प्रवीण देशमुख, ओमप्रकाश पांडेय, विजय पंडित, मदन उपाध्याय, रामस्वरूप साहू, मदन उपाध्याय और जयप्रकाश मिश्र ‘मिलिंद’ ने कविता पाठ किया।

समारोह का संचालन डा. श्यामसुंदर पांडेय और आगंतुकों के प्रति आभार प्रदर्शन डा. हरीश दुबे ने किया। समारोह में प्रमुख रूप से मनोज शुक्ल, प्रकाश कनोजिया, अनिल गर्ग, एस. के. शर्मा, दिनेश पांडेय, आर.जी दीक्षित, चंदर पांडेय, इत्यादि उपस्थित थे।

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