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निजी इस्लामिक संस्थानों को न मिले ‘हलाल सर्टिफिकेट’ – हिंदू जनजागृति समिति की मांग

मुंबई, दि. 26
हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता रमेश शिंदे ने मांग की कि केंद्र सरकार को भारत की सुरक्षा और अखंडता के मद्देनजर निजी इस्लामी संस्थानों को ‘हलाल प्रमाणीकरण’ की अनुमति नहीं देनी चाहिए।
वह रत्नागिरी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे।
भले ही भारत में एफएसएसएआई और एफडीए जैसी खाद्य प्रमाणन संस्थाएं हैं, फिर भी हलाल के पक्ष में एक समानांतर इस्लामी अर्थव्यवस्था बनाई जा रही है। शिंदे ने यह भी कहा कि इस अर्थव्यवस्था से प्राप्त धन का उपयोग जिहादी आतंकवादियों को कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए किया जा रहा है।
जमीयत-उलेमा-ए-हिंद, हलाल इंडिया प्रा. लिमिटेड’ आदि निजी इस्लामिक संगठनों को हलाल सर्टिफिकेशन की मंजूरी देने के लिए ऐसी मंजूरी देने का अधिकार केंद्र सरकार की संस्था ‘एफएसएसएआई’ को दिया जाना चाहिए। न केवल ‘मैकडोनाल्ड’, ‘केएफसी’, ‘बर्गर किंग’ जैसे विदेशी प्रतिष्ठान, बल्कि हल्दीराम, बिकानो जैसे कई भारतीय शाकाहारी प्रतिष्ठान भी सभी ग्राहकों को हलाल प्रमाणित भोजन बेच रहे हैं। हिंदू व्यापारियों को प्रत्येक उत्पाद के लिए 47,000 रुपये का शुल्क देकर ‘हलाल प्रमाणपत्र’ और उसका ‘लोगो’ खरीदना पड़ता है। साथ ही इसके रिन्यूअल के लिए हर साल 16 से 20 हजार रुपये चुकाने पड़ते हैं. यह पैसा बिना किसी कारण के निजी इस्लामिक संगठनों को देना पड़ता है। नए हलाल नियमों के अनुसार, अब हलाल प्रमाणपत्र धारक के लिए अपने प्रतिष्ठान में 2 मुसलमानों को ‘हलाल इंस्पेक्टर’ के रूप में नियुक्त करना अनिवार्य है। शिंदे ने कहा कि इससे करोड़ों रुपये इकट्ठा किये जा रहे हैं।
इस समय चातुर्मास चल रहा है और इस समय हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हमारे घर में हलाल प्रमाणित उत्पाद न आएं। कोई भी सिख भाई हलाल नहीं खा सकता। यह उनके धर्मग्रन्थों में स्पष्ट है। शिंदे ने निष्कर्ष निकाला कि देश में केवल 15 प्रतिशत मुसलमानों के लिए धार्मिक ‘हलाल’ प्रणाली को शेष 85 प्रतिशत गैर-मुसलमानों पर थोपना उनके संवैधानिक धार्मिक अधिकारों और उपभोक्ता अधिकारों के खिलाफ है।

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