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राकपा एनडीए का हिस्सा बन सकती है, UBTसेना को कॉंग्रेस के साथ लड़ना होगा चुनाव ?

रविवार दोपहर महाराष्ट्र की राजनीति में एक भूचाल आया जिसमें यहां के राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विरोधी पक्ष नेता अजित पवार ने अपने दल के 39 विधायकों को लेकर राज्य की सत्ताधारी शिवसेना भाजपा सरकार में शामिल हो गई। राज्य में आए इस राजनीतिक भूचाल पर लगभग सभी न्यूज़ एजेंसियां हर एंगल से इस बारे में न्यूज़ प्रसारित कर रही है

लेकिन इस घटना के महज २४ घंटे बितते बितते परिस्थितियां ऐसी बन रही है की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सुप्रीमो शरद पवार अपने पार्टी में हुए इतने बड़े दलबदल को नजरअंदाज कर नए सिरे से पार्टी गठन का काम शुरू कर सकते हैं या फिर केंद्र सरकार की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन में शामिल होकर आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं ऐसे में राज्य में शिवसेना को आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लड़ने का एकमात्र विकल्प बच जाता है।

रविवार दोपहर को राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार में राष्ट्रवादी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विरोधी पक्ष नेता अजित पवार ने शामिल होते हुए उप मुख्यमंत्री की शपथ ली। उनके साथ राष्ट्रवादी कांग्रेस के कार्याध्यक्ष प्रफुल पटेल, छगन भुजबल, दिलीप वलसे पाटील, हसन मुश्रीफ, धनंजय मुंडे, धर्मराज आत्रम, आदिति तटकरे, संजय बनसोडे, अनिल पाटिल जैसे दिग्गजों के साथ कुल 39 लोगों ने राज्य की एकनाथ शिंदे की सरकार को अपना समर्थन जाहिर किया। और कुछ विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली।

राज्य में हुए इस विकट राजनीतिक उठापटक के 24 घंटे भी नहीं पूरे हुए हैं लेकिन इस दौरान लगातार चित्र बदलते नजर आ रहे हैं अपने पार्टी में हुए इस इतने बड़े उठापटक के बावजूद शरद पवार ने विद्रोहियों पर कोई कार्रवाई नहीं करने की घोषणा के साथ अपने पार्टी को नए सिरे से संगठित करने की घोषणा की। वही राकपा विद्रोही दल के नेता अजित पवार ने राज्य सरकार में उप मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद यह बिल्कुल साफ कर दिया की हम लोग राष्ट्रवादी हैं इसीलिए हम राष्ट्रवादी दलों के साथ आ गए हैं अजित पवार ने या फिर उनके दल के किसी भी नेता ने राकपा सुप्रीमो शरद पवार पर विरोधाभास की वयानबाजी नहीं की।

इस घटनाक्रम के कुछ समय बाद मीडिया में ही यह खबर चली कि कुछ उत्साही राकपा कार्यकर्ता अपने अपने क्षेत्र में लगे बैनर पोस्टर पर छपे अजित पवार व अन्य विद्रोही नेताओं के चित्रों पर कालिख पोतनी शुरू कर दी है तो कुछ ही देर में यह भी खबर आइ कि ठाणे में ऐसे ही पोस्टर पर कालिख पोते जाने की घटना के बाद शरद पवार गुट के नेता जितेंद्र आव्हाड ने बैनर पर पुते कालिख को खुद मिटाया और अपने कार्यकर्ताओं को ऐसा नहीं करने की सख्त हिदायत भी दी।

फिर नए मुख्य उपमुख्यमंत्री ने राज्य भर के अपने समर्थकों को अभिवादन में लगाए जा रहे बैनर पोस्टर पर राकांपा सुप्रीमो शरद पवार का भी चित्र लगाने की हिदायत दी। और सोमवार सुबह मीडिया में यह भी खबर खासी चर्चा में रही की अजित पवार गुटके नेतागण आज राकपा सुप्रीमो शरद पवार से मिलने जा सकते हैं।

राज्य में बीते 24 घंटों के घटनाक्रमों में से यह अंदाजा लगाना गलत नहीं है की राकपा सुप्रीमो पवार भले ही राकपा को पुनर्गठित करने की बात कर रहे हो या उनके गुट के नेता अजित पवार गुट के नेताओं पर कानूनी कार्रवाई करने कि बयानबाजी कर रहे हो लेकिन दोनों दलों से जो समन्वय बनाए रखने वाली प्रतिक्रिया आ रही है उससे यह साफ हो रहा है की शरद पवार भी केंद्र की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन में शामिल हो सकते हैं।

वैसे भी शरद पवार ने अपने दल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की स्थापना ही कांग्रेस विरोध की राजनीति के तहत की थी। और कल रविवार को अजित पवार ने भी उप मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण के बाद आयोजित पत्रकार परिषद में यह साफ कहा कि हम राष्ट्रवादी है, इसीलिए राष्ट्रवादी दलों के साथ आ गए। इसके साथ 2014 में राज्य में अल्पमत में रहे भारतीय जनता पार्टी की सरकार को शरद पवार ने बिना शर्त समर्थन दिया था।

आगामी लोकसभा चुनाव के लिए 1 वर्ष से भी कम समय बचा है देशभर में कांग्रेस के नेतृत्व में विरोधी खेमा एकजुट होने की कोशिश कर रहा है और इसमें शरद पवार राकपा सुप्रीमो पवार की भूमिका महत्वपूर्ण थी। लेकिन रविवार को हुए इस अपने दल के इस विद्रोह से शरद पवार का बैकफुट पर आना स्वभाविक होगा। और अगर वह अगामी आगामी लोकसभा चुनाव एनडीए के साथ मिलकर लड़े, तो इसमें आश्चर्य जैसा कुछ भी नहीं होगा और ऐसे में राज्य में उधव ठाकरे गुटके शिवसेना को कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ने की मजबूरी होगी

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