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सर्वांगीण विकास के लिए संस्कृति एवं संस्कार के अनुरूप आचरण आवश्यक है-सचिन ठाकुरदेसाई 

डोंबिवली, दि . 26
पुरोहित मंडल, डोंबिवली (पूर्व) के अध्यक्ष सचिन ठाकुरदेसाई ने रविवार को यहां कहा कि हमें अपने जीवन के समग्र विकास के लिए भारतीय संस्कृति और संस्कारों के अनुसार आचरण करना चाहिए।
वह ज्ञानेश्वर मंगल कार्यालय में ब्राह्मण महासंघ डोंबिवली और शुक्ल यजुर्वेदीय माध्यंदिन ब्राह्मण सभा के सहयोग से आयोजित ‘नित्य धार्मिक कर्म और हम’ विषय पर व्याख्यान में बोल रहे थे।
तुमने दिन में क्या किया आज? आपने कैसा व्यवहार किया? ठाकुरदेसाई ने कहा कि सभी को सोते समय अपने मन से इस पर विचार करना चाहिए, उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल आधार मनुष्य का सर्वांगीण विकास है। आधुनिक समय में हमने इसे ही ख़त्म कर दिया है।
हमें सदैव इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हम जिस देवता की पूजा कर रहे हैं, जो भी गुरु है, वह हमारी ओर ध्यान दे रहा है। यानि हमसे कोई भी बुरा काम नहीं होगा। कुछ पाने के लिए पोथी , पुराण मत पढ़ो। इसलिए इसमें बताए गए आचार, विचार, जीवन मूल्यों को वास्तविक जीवन में लागू करें। संत साहित्य, वेद, उपनिषद हमारे मन को संस्कारित करने का काम करते हैं। पोथी , पुराण पढ़ने से या  इन साहित्यों को पढ़कर गंदे विचार की भाषा मुंह में आ जाए तो क्या फायदा? ऐसा सवाल भी उन्होंने उठाया।
ठाकुरदेसाई ने सुबह स्नान, देवपूजा, स्तोत्र पाठ, सूर्योपासना और उसके महत्व, ब्रह्मचर्य आश्रम, गृहस्थाश्रम, मूंज, विवाह में हमारे कर्तव्यों के बारे में विस्तार से बताया।
शुक्ल यजुर्वेदीय माध्यंदिन ब्राह्मण सभा के अध्यक्ष सुधीर बर्डे, ब्राह्मण महासंघ के अध्यक्ष मानस पिंगले ने अपने संगठन के कार्यों के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी. शुक्ल यजुर्वेदीय माध्यन्दिन ब्राह्मण सभा के ट्रस्टी अध्यक्ष मधुकर उर्फ ​​अप्पा कुलकर्णी ने ठाकुरदेसाई का स्वागत किया।

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