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फेस पैक लगाकर अदालती कारवाई में पेश हुई महिला वकील,फिर….

 

इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा की जा रही वर्चुअल सुनवाई के दौरान एक महिला वकील अपने मुंह पर फेस मास्क लगाकर ही पेश हो गई।

न्यायालय को इस महिला वकील का ये लापरवाही भरा व्यवहार नागवार गुजरा। और इस सिंगल जज के बेंच ने वकीलों के लिए अदालती कारवाई के दौरान ड्रेस कोड की अनिवार्यता लागू कर दी है।

प्रयागराज उच्च न्यायालय ने वर्चुअल सुनवाई के दौरान सामान्यतः बहू रंगीन शर्ट, टी -शर्ट और बनियान तथा मुंह पर फेस पैक लगाकर ही पेश हो जाने वाले वकीलों की इस तरह की कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाया है।

अदालत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान अपने आदेश में कहा है कि अधिवक्ताओं की आकस्मिक पोशाक में उपस्थिति किन्हीं भी परिस्थितियों में बहुत ही अनुचित और अस्वीकार्य है।

अधिवक्ताओं को यह समझना चाहिए कि उनके घर या कार्यालय अथवा कक्ष से वर्चुअल मोड के माध्यम से मामलों की सुनवाई के लिए उनकी उपस्थिति एक विस्तारित अदालत कक्ष की तरह है और यह सुनवाई उसी तरह से गंभीर है, जिस प्रकार अदालत में एक कार्यवाही के दौरान होता है।

अदालत ने कहा है कि वर्चुअल मोड के तहत अदालत में पेश होने के दौरान वकीलों को सादी सफेद शर्ट, महिलाओं को सफेद सलवार-कमीज तथा सफेद साड़ी पहननी होती है।

जिस प्रकार से वकील पेश होते हैं वहां शांतिपूर्ण वातावरण के साथ सभ्य और प्रस्तुत करने योग्य पृष्ठभूमि होनी चाहिए। अदालत ने कहा है कि वह न्यायालय के प्रति चौकस रहें। अगर वकील सुनवाई के समय काला कोट भी पहनते हैं तो यह बहुत ही अच्छा होगा।

न्यायालय ने अपने आदेशों में कहा है कि आज वर्चुअल मोड के माध्यम से वर्तमान मामले की सुनवाई करते हुए एक पक्ष की ओर से पेश हुआ वकील कॉलर वाली टी शर्ट पहने हुए दिखाई दिया और अदालत द्वारा उसके इस आचरण पर आपत्ति जताए जाने के बाद भी वकील ने कोई पछतावा नहीं दिखाया।

अदालत ने अपने आदेश में इस तरह की उपस्थिति के पिछले दिनों के उदाहरणों का हवाला भी दिया है। जिसमें फेस पैक मुंह पर लगाए एक महिला वकील अदालत के सामने पेश हो गई। एक वकील साहब तो स्कूटर चलाते समय ही सुनवाई में भाग लेने लगे। जबकि एक वकील साहब बनियान पहनकर ही अदालत के सामने पेश हो गए थे।

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