(राजेश सिन्हा)
गुड़ी पाड़वा के दिन महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने अपने पार्टी की तरफ से आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन में प्रखर हिंदूवादी एजेंडे पर अपना वक्तव्य दिया।
जिसपर राज्य में प्रमुख सत्ताधारी दल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और शिवसेना के नेतागण उसी समय से जोरदार ढंग से मनसे प्रमुख का विरोध कर रहे हैं।
दोनो दलों के नेताओ के मनसे का लगातार विरोध से इन्हें इनके दल राकपा और शिवसेना को क्या फायदा मिलेगा यह वे जाने, लेकिन मनसे प्रमुख के विरुद्ध उनके लगातार बयानबाजी का ही नतीजा है की, राज्य भर में लगातार आयोजित हो रही मनसे की सभाओं में जबरदस्त भीड़ बढ़ रही हैै।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने अपने पार्टी की स्थापना के दौरान मराठी हित के साथ सभी जाति धर्म के लोगों को साथ में लेकर चलने की प्रतिबद्धता दिखाते हुए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के गठन किए जाने की का दावा किया था।
लेकिन इस गुड़ी पाड़वा के दिन मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने भाषण में विभिन्न मुद्दों के साथ अपने हिंदूवादी विचारधारा को खुलकर अपने समर्थकों के सामने रखा।
उस दिन उन्होंने राज्य भर में मस्जिदों पर अवैध रूप से लगाए गए लाउडस्पीकर और इसकी ध्वनि सीमा पर अनेक सवाल उठाए।
जिसका उन्हें, राज्य भर में उनके समर्थकों का जोरदार साथ मिला है। अब मनसे प्रमुख राज्य भर में घूम-घूम कर इसी मुद्दे पर बात करते हैं।
और आपने पार्टी की जमीन मजबूत करने की कोशिश में लग गए है।जिसमें उन्हें खासी सफलता भी मिल रही है।
पिछले दिनों ठाणे में आयोजित उनकी सभा में उन्होंने राज्य सरकार को 3 मई तक का अल्टीमेटम दिया है।
उनके अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के धार्मिक स्थलों पर अवैध लाउडस्पीकर यथाशीघ्र हटा लिए जाने का आदेश सभी राज्य सरकार को दिया है।
बावजूद इसके सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन महाराष्ट्र सरकार द्वारा नहीं किया जा रहा है।
इसी आधार पर मनसे प्रमुख ने राज्य सरकार को 3 मई तक राज्य के सभी मस्जिदों पर अवैध ढंग से लगाए गए लाउडस्पीकर को हटाने की मांग की है।
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अन्यथा मनसे कार्यकर्ताओं द्वारा मस्जिदों के सामने सार्वजनिक रूप से हनुमान चालीसा पढ़ने की चेतावनी दी है।
प्रत्यक्ष रूप से राज्य सरकार में शामिल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और शिवसेना भले ही मनसे प्रमुख राज ठाकरे के इस मुद्दे का विरोध कर रही है।
लेकिन इन दोनों दलों के विरोध का ढंग यह बता रहा है की राकपा और शिवसेना जानबूझकर राज्य भर में लाउडस्पीकर मामले को हवा दे रही है ।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर सरकार को अवैध लाउडस्पीकर हटाना मजबूरी है। और देर सवेर राज्य की आघाडी सरकार को भी अपनेेे राज्य के मस्जिदों पर अवैध रूप से बजाए जा रहे हैं लाउडस्पीकर को हटाना पड़ेगा।
लेकिन दोनों दल के नेता गन के बयानबाजी से यह साफ जाहिर हो रहा है कि वे वह इस मुद्दे का पूरा श्रेय राज ठाकरे को ही देकर मनसे को हिंदूवादी दल का ठप्पा लगा देना चाहते हैं।
जबकि इस पूरे विवाद में भा ज पा और राज्य सरकार में शामिल प्रमुख दल कांग्रेस पूरी तरह से चुप्पी साधे बैठी है।
ज्ञात हो कि गुड़ी पाड़वा पर मनसे प्रमुख द्वारा अवैध लाउडस्पीकर पर दिए गए अपने वक्तव्य पर शिवसेना नेता संजय राऊत, राज्य के गृह मंत्री दिलीप वलसे पाटील, और अजीत पवार लगातार विरोधी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
इसका फायदा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मनसे प्रमुख की राज्य भर में लगातार आयोजित सभाओं में बढ़ती उपस्थिति से समझा जा सकता है।
जबकि राकांपा और शिवसेना के नेता ये जानते हैं इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीधा आदेश जारी किया है।
जिसे मानना राज्य सरकार की मजबूरी है 2 दिन पहले राज्य सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में सर्वसम्मति से सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पर सहमति भी बन गई है।
बावजूद इसके दोनों दल के नेता इस मामले में बढ़-चढ़कर बयानबाजी करके इस मामले को तूल दे रहे हैं।
जल्द ही -:
(राकांपा और शिवसेना क्यों मनसे को राज्य में हिंदूवादी पार्टी का ताज पहनाना चाहती है?
इस मामले में कांग्रेस की चुप्पी क्यों?
इस पूरे मामले में भाजपा का क्या रोल है?
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