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छ्त्रपती संभाजी महाराज का अपमान करने वाली पत्रकार गिरीश कुबेर की पुस्तक पर राज्य सरकार मौन क्यों ?

मदर टेरेसा के संपादकीय पर तुरंत क्षमा मांगनेवालेे कुबेर छ. संभाजी महाराज के अपमान पर क्षमा क्यों नहीं मांगते ?* – हिन्दू जनजागृति समिति

पत्रकार गिरीश कुबेर की ‘रेनिसान्स स्टेट : द अनरिटन स्टोरी ऑफ द मेकिंग ऑफ महाराष्ट्र’ नामक पुस्तक में दिए गए विवादित विवरण से शिवप्रेमियों में प्रचंड क्रोध की लहर है ।

अनेक संगठनों ने आरोप लगाया है कि, इस पुस्तक में छत्रपति संभाजी महाराज की बदनामी की गई है तथा कोल्हापुर के छत्रपति गद्दी के वंशज संभाजीराजे छत्रपति ने स्वयं इस संदर्भ में राज्य सरकार से इस पुस्तक पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है ।

बावजूद इसके राज्य सरकार द्वारा पत्रकार कुबेर पर कोई कार्यवाही नहीं किए जाने पर हिंदू जनजगृति समिति ने आश्चर्य व्यक्त किया है। और सरकार से इस पर उचित कार्यवाही के साथ इस पुस्तक में लिखे गए अपमानजनक विवरण के संदर्भ में एक इतिहास अध्ययनकर्ताआें की समिति नियुक्त कर लेखक पर उचित कार्यवाही करने तथा इस दौरान पुस्तक पर प्रतिबंध लगाने की मांग हिन्दू जनजागृति समिति ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को निवेदनपत्र भेेजकर की है ।

पत्रकार गिरीश कुबेर निरंतर विवादित लेख लिखते रहते हैं । छ. शिवाजी महाराज और छ. संभाजी महाराज के हिन्दवी स्वराज्य के कालखंड तथा तत्कालीन भिन्न राजकीय परिस्थिति को ध्यान में न लेते हुए इन दोनों नरवीरों की तुलना करना अनुचित ही है ।

उसमें भी छत्रपति संभाजी महाराज के पास शिवाजी महाराज के समान सहनशीलता और विदेश नीति नहीं थी । छत्रपति शिवाजी महाराज की मृत्यु के उपरांत गद्दी पर आने के लिए संभाजी ने रक्त बहाया, ऐसा सीधा आरोप लगाना इस महापुरुष को कलंकित करना है ।

बाबर-औरंगजेब आदि क्रूर शासकों के अत्याचार छिपाकर उनके जीवन की केवल सहिष्णुता दिखानेवाले प्रसंगों की ही चर्चा करनेवाले इन सेक्युलर पत्रकारों को अचानक छ. संभाजी महाराज की असहिष्णुता का भान होने के पीछे निश्‍चित ही कुछ उद्देश्य है ।

उसमें भी ‘इतिहास में छत्रपति शिवाजी महाराज से मिलता जुलता यदि कोई व्यक्तित्व होगा तो वह बाजीराव पेशवा हैं’, ऐसा उल्लेख कर पुनः मराठा-ब्राह्मण विवाद कहीं पुनः कुरेदने का तो प्रयास नहीं किया जा रहा है, यह भी सरकार को तत्परता से देखना चाहिए ।

गिरीश कुबेर ने लोकसत्ता के संपादकीय ‘असंतों के संत’ से मदर टेरेसा के संबंध में लेख लिखा था, तब ईसाई समाज ने विरोध किया था । उस समय दूसरे ही दिन वे प्रथम पृष्ठ पर क्षमा मांगकर मुक्त हो गए थे ।

तब हिन्दू समाज के लाखों शिवप्रेमियों द्वारा इतनी बडी मात्रा में विरोध होते हुए भी छ. संभाजी महाराज से संबंधित लेख के संदर्भ में अपनी भूमिका वे स्पष्ट क्यों नहीं करते ? सरकार इस संबंध में अब तत्काल कार्यवाही करे, ऐसी हमारी मांग है ।

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