शिवसेना के संस्थापक रहे दिवंगत शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के बेटे जयंवत ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीच वसीयत के लिए चल्र रहे विवाद को पूर्ण विराम लग गया है. दिवंगत शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के मृत्यु पूर्व लिखी गयी वसीयत को चुनौती देने वाली याचिका को शुक्रवार को जयंवत ठाकरे ने हाई कोर्ट से वापस ले लिया। जयदेव ने 13 दिसंबर 2011 को बनी इस वसीयत को चुनौती देने वाली याचिका नवंबर 2012 में बाल ठाकरे के निधन के बाद दायर की थी। इस वसीयत में जयदेव को दिवंगत शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे द्वारा कुछ भी नहीं दिया गया। जयदेव ने वसीयत को गलत बताते हुए कहा था कि उनके पिता की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और भाई उद्धव ठाकरे का उन पर प्रभाव था।
शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने उनकी वसीयत में अपनी संपत्ति का अधिकांश हिस्सा उद्धव ठाकरे के नाम कर दिया था।और जयदेव के अलावा बाल ठाकरे ने अपने तीसरे बेटे बिंदुमहादेव ठाकरे या उनके परिवार को भी अपनी सम्पत्ति से कुछ भी नही दिया था।शुक्रवार को हाईकोर्ट में जयदेव ठाकरे ने अपने हलफनामे में कहा है कि वह अपने मुकदमे को बंद करना चाहते हैं। उन्होंने मुकदमा वापस लेने की कोई वजह जाहिर नहीं की।जिसे न्यायलय ने स्वीकृति देते हुए आवश्यक कारवाई के निर्देश दिए है
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