मुंबई: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने राज्य में बच्चों के लापता होने और उनके अपहरण की बढ़ती घटनाओं पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सीधे और कड़ा सवाल किया है। ठाकरे ने अपने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए एक अत्यंत सख्त पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने इस गंभीर समस्या पर तत्काल और कठोर कार्रवाई की मांग की है।
बढ़ता खतरा: NCRB के आंकड़ों के अनुसार ३०% की वृद्धि
ठाकरे ने अपने पत्र में नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों का उल्लेख किया है। उनके अनुसार, २०२१ से २०२४ की अवधि में राज्य में बच्चों के लापता होने की घटनाओं में लगभग ३०% की वृद्धि हुई है।
राज ठाकरे का मुख्यमंत्री से प्रश्न: “बच्चों को अगवा कर, बाद में उनसे मजदूरी करवाने, उनसे भीख मंगवाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह सक्रिय हो गए हैं। और ये गिरोह सरेआम बच्चों को उठा रहे हैं और इस पर सरकार आखिर क्या कार्रवाई कर रही है, यही समझ नहीं आ रहा…”
‘सरकारी जवाब’ नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए!
राज ठाकरे ने स्पष्ट किया है कि महाराष्ट्र को केवल ‘इतने मामले दर्ज हुए और इतने बच्चे ढूंढ लिए गए’ इस आशय का सरकारी जवाब नहीं चाहिए। उन्होंने प्रशासन की कार्यक्षमता पर ही सवाल उठाए हैं:
* जांच और सदमा: बच्चे वापस मिल भी जाएं, तो उस दौरान उनके मन पर हुए आघात का क्या?
* गिरोह कैसे सक्रिय? बच्चों को अगवा करने वाला गिरोह इतनी आज़ादी से काम कैसे करता है?
* DNA टेस्ट की मांग: सड़कों पर भीख मांगने वाले बच्चे और उनके साथ के लोग सचमुच उनके माता-पिता हैं या नहीं, यह जांचने के लिए, जरूरत पड़ने पर DNA टेस्ट का आदेश सरकार क्यों नहीं देती?
विधानमंडल सत्र पर भी कटाक्ष
मुख्यमंत्री फडणवीस के पास गृह मंत्री का भी प्रभार होने के कारण, ठाकरे ने सीधे तौर पर प्रशासनिक और राजनीतिक तंत्र की उदासीनता पर उंगली उठाई है। उन्होंने सवाल किया है कि क्या शीतकालीन सत्र का उपयोग केवल ‘अनुपूरक मांगों को मंजूरी देने’ के लिए किया जा रहा है।
“आज इस राज्य में छोटे बच्चों का अपहरण हो रहा है, युवा लड़कियों का अपहरण हो रहा है, महाराष्ट्र की ज़मीनें छीनी जा रही हैं। क्या इस पर विधानमंडल में चर्चा होनी चाहिए… क्या सत्ताधारी और विपक्षी दलों को ऐसा नहीं लगता?”
राज्य की अपेक्षा: मुख्यमंत्री ध्यान दें
पत्र के अंत में, राज ठाकरे ने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री के नाते देवेंद्र फडणवीस से इस अत्यंत गंभीर विषय पर ध्यान देकर, केवल चर्चा न करवाकर, बल्कि कुछ ठोस कार्रवाई करने की अपेक्षा की है।
महाराष्ट्र में बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि गंभीर राजनीतिक और सामाजिक विषय बन गया है, और राज्य की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।
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