शीतला प्रसाद सरोज
मुंबई। विश्वकर्मा समिति, मुंबई के तत्वाधान में भगवान विश्वकर्मा प्राकट्य दिवस माघ शुक्ल त्रयोदशी को सांताक्रुज के कालीना स्थित विश्वकर्मा समिति हॉल में धूमधाम से मनाया गया।
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समारोह के अतिथि संस्था के पूर्व चेयरमैन एड. टी. एस. विश्वकर्मा ने समाज के लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि सामाजिक संस्थाओं का मूल उद्देश्य समाज हित होना चाहिए। सामाजिक संस्थाओं को आर्थिक सहायता के रूप में दान देकर विकास कार्यों में सहभागिता की जा सकती है.
मगर दान स्वरूप दी गई निधि के बदले संस्था को अंगीकार कर लेना सही नहीं होगा।उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को हर क्षेत्र में सक्षम बनाने के लिए हमें शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरुरत है।
इस मौके पर विश्वकर्मा वंशज विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। अखंड विश्वकर्मा ब्राह्मण महासभा के संस्थापक अध्यक्ष पं. संतोष आचार्य ने कहा कि विश्वकर्मा समाज में इंजीनियरिंग की विधा जन्म से ही भगवान विश्वकर्मा के आशीर्वाद से मिली है, जिसमें कर्म की प्रधानता है।
पांच प्रकार के शिल्पकर्मों लौहकार, काष्ठकार, ताम्रकार, मूर्तिकार व स्वर्णकार में निपुण ब्राह्मणों को पंचशिल्पी ब्राह्मण कहा जाता है। इन्हीं पांचाल ब्राह्मणों को संपूर्ण भारतवर्ष में विराट संदर्भ विश्वकर्मा वैदिक ब्राह्मण कहा जाता है।
कार्यक्रम में संस्था के पूर्व महामंत्री मोतीलाल विश्वकर्मा, मनपा के वरिष्ठ निरीक्षक अजय विश्वकर्मा, राधेश्याम विश्वकर्मा, लल्लूराम विश्वकर्मा, मेवालाल विश्वकर्मा आदि ने भी सामाजिक एकता पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार गंगाराम विश्वकर्मा ने किया।
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