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मनसे बीजेपी और पानी का सवाल !!

मनसे बीजेपी और पानी का सवाल !!
(कर्ण हिंदुस्तानी )
सोमवार को मनसे और बीजेपी ने मिलकर कल्याण डोम्बिवली मनपा पर पानी की कमी को लेकर विशाल जनमोर्चा आयोजित किया।

इस मोर्चे का नेतृत्व मनसे के कार्यसम्राट विधायक राजू पाटिल और बीजेपी के पूर्व राज्यमंत्री तथा मौजूदा विधायक रविंद्र चव्हाण ने किया। सैंकड़ों नागरिकों को लेकर यह मोर्चा मनपा मुख्यालय पहुंचा लेकिन मनपा आयुक्त नदारद थे।

मजबूरन मोर्चा लेकर जाने वाले लोगों को मनपा के कनिष्ठ अधिकारियों से मिलना पड़ा। अब सवाल यह उठता है कि क्या इस मोर्चे को आयोजित करने वालों को यह पता नहीं था कि मनपा आयुक्त डॉ सूर्यवंशी इस वक़्त कल्याण में ना होकर सूरत में हैं और मनपा को घोषित हुए पुरस्कार को हासिल करने गए हुए हैं।

कनिष्ठ अधिकारियों से मिलकर दोनों विधायकों को क्या हासिल हुआ ?यह तो वही जानें लेकिन ऐसा कई बार हुआ है कि विधायक महोदय मनपा पहुंचे हैं और आयुक्त से नहीं मिल पाए।

इसको कहते हैं नियोजन का अभाव। यदि सही मायने में पानी की समस्या का मुद्दा गंभीरता से मनपा प्रशासन के सामने रखना है तो बाकायदा मनपा आयुक्त के उपस्थित होने की जानकारी रखनी होगी।

वैसे भी जब से मनपा का गठन हुआ है और नगरसेवक चुनकर आए हैं। तब से अब तक सिर्फ एक बार ही नब्बे एम एल डी पानी योजना का बोलबाला ही देखा गया है।

वह भी टी चंद्रशेखर के समय। उसके बाद मनपा क्षेत्र का विकास हुआ और कल तक जहां चॉल हुआ करती थी आज वहाँ पर गगनचुम्बी इमारतें खड़ी हैं।

इन इमारतों को पेयजल की सुविधा कहाँ से मिलेगी ? इसका कोई नियोजन नहीं है। सत्ताईस गाँवों में पेयजल समस्या गंभीर है। इसे मान्य करना ही होगा। लेकिन उसके लिए क्या सिर्फ मनपा प्रशासन ही जिम्मेदार है ?

१९९५ से अब तक थाने जिले को कई बार कैबिनेट मंत्री पद मिल चुका है। एक समय तो यह था कि ठाणे जिले को गणेश नाइक , साबिर शेख और जगन्नाथ पाटिल जैसे तीन तीन मंत्री मिले हुए थे और तीनों कैबिनेट मंत्री थे।

तब भविष्य के लिए कोई पेयजल परियोजना क्यों तैयार नहीं की गयी ? कल्याण ग्रामीण के मनसे विधायक राजू पाटिल स्थानिक विधायक हैं और सत्ताईस गाँव की पेयजल समस्या को वह अच्छी तरह से समझते हैं।

उनको कम से कम आयुक्त की उपस्थिति का पता लगाकर मनपा मोर्चा ले जाना चाहिए था। यदि सही मायने में पानी की समस्या का हल निकालना है तो सबसे पहले जल वितरण व्यवस्था के बारे में गंभीरता से विचार करना होगा।

जगह जगह टूटी हुई जलवाहनियों की तलाश कर उनकी मरम्मत करवानी होगी। सत्ताईस गाँवों के क्षेत्र में बन रहे गृहसंकुलों के लिए यह शर्त अनिवार्य की जाए कि वह बरसाती पानी को जमा करने की योजना पर अमल करें ।

जिससे कम से कम कुछ समस्या तो हल हो सकेगी। वरना इस तरह से मनपा मुख्यालय पर मोर्चा ले जाने से कुछ होने वाला नहीं है। मनपा आयुक्त से इस बारे में गंभीरता पूर्वक चर्चा कर कुछ हल निकालना होगा।

तभी कुछ हो सकता है वरना ऐसे मोर्चे से गैंडे की चमड़ी वाले मनपा अधिकारियों पर कोई असर नहीं होने वाला है।

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