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आश्वासनों का लॉलीपॉप  फिर शुरू, चुनावी गंगा से गायब हुआ स्मार्ट सिटी प्रकल्प

(मुंबई आसपास ब्यूरो )
कल्याण – जल्द ही विधानसभा चुनावों का बिगुल बजने वाला है और इस बिगुल के बजने से पहले ही विभिन्न जनउपयोगी कार्यों का भूमिपूजन कार्यक्रम शुरू हो गया है। इन भूमिपूजन कार्यक्रमों को जनता आश्वासनों का लॉलीपॉप मानकर चल रही है। क्योंकि २०१४ के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में स्मार्ट सिटी का जमकर ढिंढोरा पीटा गया था। मगर २०१९ के लोकसभा और अब विधानसभा चुनावों में  स्मार्ट सिटी का जिक्र तक सुनने को नहीं मिल रहा है।सूत्रों पर यदि भरोसा किया जाए तो स्मार्ट सिटी योजना से कल्याण डोम्बिवली का नाम हट चुका  है। इसी वजह से शायद स्मार्ट सिटी का जिक्र सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना करने से कतरा रही है।

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कल्याण मनपा क्षेत्र  की बात करें तो इस मनपा क्षेत्र में चार विधान सभा क्षेत्र आते हैं। डोम्बिवली , कल्याण पूर्व – पश्चिम और कल्याण ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र। इन चारों विधान सभा क्षेत्रों में एक भी कार्य विगत पांच सालों में नहीं हुआ है , जिस कार्य को चारों विधायक जनता के सामने रख कर वोटों की उम्मीद कर सकें। पिछली बार की तरह इस बार भी हजारों करोड़ के प्रकल्पों को पूरा करने का ढोल पीटा जा रहा है।

चारों विधानसभा क्षेत्रों में बड़े – बड़े होर्डिंग (अवैध ) लगाकर बड़ी – बड़ी बातें की जा रही हैं।  मगर जनता की जरूरतों को समझने का प्रयास चारों  विधायक नहीं कर रहे हैं। सबसे पहले बात करें डोम्बिवली विधानसभा क्षेत्र की तो यहां रविंद्र चव्हाण नामक विधायक हैं , जिन्हें राज्य सरकार में राजयमंत्री का दर्जा प्राप्त है। मगर डोम्बिवली की जनता को इन मंत्री महोदय से कोई फायदा नहीं पहुँच रहा है। डोम्बिवली की जनता मूल सुविधाओं से कल भी वंचित थी आज भी वंचित है।

डोम्बिवली की जनता को विधायक महोदय से अब कोई उम्मीद भी नहीं है क्योंकि जनता समझ चुकी है कि दस सालों में जिस विधायक ने सिवा आश्वासन के कुछ नहीं दिया वह अब क्या देगा। खस्ताहाल सड़कें , पेयजल की समस्या , यातायात की दिक्क्तें और अब कोपर पुल का बंद होना डोम्बिवली की जनता के लिए त्रासदायक बन चुका है।

भारतीय जनता पार्टी का गढ़ होने की वजह से डोम्बिवली विधानसभा क्षेत्र से भाजपा किसी को भी जनता के माथे मढ़  देती है। जिसका नतीजा जनता को कैसे भुगतना पड़ता है यह रविंद्र चव्हाण के दस साल के कार्यकाल को देखने पर पता चल जाता है। यदि भाजपा इस बार जनता के मत को जानकर उमीदवार निश्चित करेगी तो रविंद्र चव्हाण को जनता एक सिरे से खारिज कर देगी।

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कल्याण ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां शिवसेना के सुभाष भोईर विधायक हैं। इस विधानसभा क्षेत्र में ग्रामीण भाग शामिल है।  मनपा से कई सालों तक रूठे रहने के बाद मनपा में शामिल होने वाले २७ गाँव में कोई भी नागरिक सुविधा नहीं है। किसी जमाने में अम्बरनाथ विधानसभा क्षेत्र में आने वाले  कल्याण ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र का नेतृत्व पहले शिवसेना के ही शाबिर शेख किया करते थे।  तब भी इस विधानसभा क्षेत्र का कोई भी विकास नहीं हुआ था और आज भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। सड़कों की हालत , पेयजल की समस्या और आरोग्य सेवा का नाम तक इस विधानसभा क्षेत्र में नहीं है। यदि कुछ कार्य हुआ है तो विधायक महोदय का अति आधुनिक जनसम्पर्क कार्यालय जरूर खुला है। काम के नाम पर शिवसेना के विधायक सुभाष भोईर भी फिसड्डी साबित हुए हैं। अब चुनाव नजदीक आने पर इस विधानसभा क्षेत्र में पेय जल की मंजूरी के लिए करोड़ों रुपयों की निधि मंजूर करने का ढोल पीटा जा रहा है।

कल्याण पूर्व विधान सभा में गणपत गायकवाड़ नामक निर्दलीय विधायक हैं। अब इन विधायक महोदय ने भाजपा का दामन थाम लिया है। लगातार दो बार विधायक चुने जाने के बाद भी गणपत गायकवाड़ ने कल्याण पूर्व की जनता के लिए कोई भी काम नहीं किया है।  कल्याण पूर्व की जनता को रेलवे स्टेशन तक जाने के लिए भी एक किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।  ऑटो रेलवे स्टेशन तक नहीं जाता है।  यदि किसी को अपने पैतृक गाँव जाना है तो सामान के साथ उसे ऑटो से पूर्व से पश्चिम तक आना पड़ता है। पेयजल की समस्या तो हर इमारत में है। यह विधायक महोदय खुद को चमकाने के लिए अपने केबल टीवी का जमकर प्रयोग करते हैं। भवन निर्माताओं को फायदा पहुंचाने का कार्य यह विधायक महोदय बखूबी करते हैं।  जबकि अपनी विधायक निधि का कुछ हिस्सा ही खर्च किया है। अब यह भाजपा से टिकिट की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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अब अंत में बात कल्याण पश्चिम विधान सभा क्षेत्र की। इस क्षेत्र से भाजपा के नरेंद्र पवार विधायक हैं। कुछ हद तक नरेंद्र पवार जनता से जुड़े रहते हैं।  मगर जनता की उमीदों पर नरेंद्र पवार भी पूरी तरह से खरे नहीं  उतरे हैं।  इस विधानसभा क्षेत्र में भी सड़कों की हालत काफी बुरी है। आरोग्य सेवा की तो बात करना भी बेईमानी है। इस विधानसभा क्षेत्र में भी बड़ी – बड़ी होर्डिंग लगाकर आश्वासन दिए जा रहे हैं।  मगर स्मार्ट सिटी प्रकल्प की तरह ही यह आश्वासन भी शायद ही कभी पूरे होंगे।

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