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आदिगुरु शंकराचार्य जी ने ही महाराष्ट्र का नामकरण किया: स्वामीश्रीः अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

 

मुंबई, 14 जुलाई 2025 — उत्तराम्नाय ज्योतिष पीठ के परम धर्माधीश, परमाराध्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामीश्रीः अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के पावन सान्निध्य में आज मुंबई में 108 कुंडीय गौ प्रतिष्ठा महायज्ञ का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामीश्री ने भगवान श्रीविष्णु के पूजन के साथ किया। यज्ञ में 108 वैदिक ब्राह्मणों ने गौमाता की रक्षा हेतु 33 कोटि देवताओं को आहुतियां समर्पित कीं।

पूरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ परमाराध्य के दर्शन और आशीर्वाद के लिए उमड़ती रही। धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र के गौरवशाली इतिहास और छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता का उल्लेख किया।

स्वामीश्री ने एक प्रेरणादायी प्रसंग सुनाया — जब बालक शिवाजी ने एक कसाई से गौमाता को छुड़ाने हेतु वीरता दिखाई और अन्याय के विरुद्ध तलवार उठाई। यही वह घटना थी, जिससे शिवाजी को जनता ने अपना नेता माना और उनका नाम प्रसिद्ध हुआ।

उन्होंने यह भी कहा कि “आदिगुरु शंकराचार्य जी ने ही इस भूभाग को ‘महाराष्ट्र’ नाम दिया था।” स्वामीश्री के अनुसार, लगभग 2500 वर्ष पूर्व जन्मे आदि शंकराचार्य जी ने 8 वर्ष की उम्र में वेदों का अध्ययन पूरा किया और 16 वर्ष की आयु तक चारों वेदों पर भाष्य लिखकर देश का चार बार भ्रमण कर भारतीय संस्कृति को एक सूत्र में पिरोया।

स्वामीजी ने बताया कि शंकराचार्य जी द्वारा रचित ‘मठाम्नाय अनुशासन’ आज भी सनातन धर्म की आधारशिला है और उन्हीं के प्रयासों से आज हम एक एकीकृत भारत देख रहे हैं।

🌺 कार्यक्रम के अन्य प्रमुख बिंदु:

पादुका पूजन राजकोट, सूरत, व मुंबई के शास्त्रियों द्वारा सम्पन्न किया गया।

वेदिक मंगलाचरण जगद्गुरुकुलम के छात्रों अंश पांडेय व अनंत झा द्वारा प्रस्तुत।

धार्मिक गीत मेरठ के आनंद प्रकाश गुप्ता व आनंद पांडेय द्वारा गाया गया।

गौध्वज यात्रा के प्रभारी देवेंद्र पांडेय जी ने अपने विचार रखे।

मंच पर दंडी स्वामी अम्बरीषानंद जी, स्वामी अप्रमेयशिवसाक्षातकृतानंद गिरी जी, विजय प्रकाश जी, मानव देवेंद्र पांडेय व नरोत्तम पारीक जी सहित अनेक संत उपस्थित रहे।

सैकड़ों श्रद्धालु व ब्रह्मचारी भी यज्ञ में उपस्थित रहे।

 

Sources – वरिष्ठ पत्रकार धनंजय शंभूनाथ मिश्रा, मुंबई ब्राह्मण एकता मंच चैरिटी ट्रस्ट