इस हेतु आनेवाले आपातकाल का अचूकता से अनुमान लेकर ज्योतिषाचार्य समाज को मार्गदर्शन करें, ऐसा आवाहन महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय के नीलेश सिंगबाल ने किया । वे ४३ वें ‘एन्युअल इंटरनेशनल कॉन्फरन्स इन एस्ट्रोलॉजी एन्ड ओरिएंटल हेरिटेज’ के आंतरराष्ट्रीय ज्योतिष परिषद में बोल रहे थे । इस परिषद का आयोजन बंगाल के ‘इंडियन इन्स्टीट्यूट ऑफ ओरिएंटल हेरिटेज’ की ओर से रविंद्र भवन ऑडिटोरियम में किया गया है ।
परिषद् में कोलकाता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संबुद्ध चक्रवर्ती और इंडियन इन्स्टीट्यूट ऑफ ओरिएंटल हेरिटेज के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण शास्त्री के हाथों महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय के नीलेश सिंगबाळ को ‘रविंद्रनाथ टागोर पुरस्कार’ देकर सम्मानित किया गया ।
७ से १० फरवरी २०२० तक चलनेवाले ज्योतिष परिषद में ८ फरवरी को नीलेश सिंगबाल ने ‘महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय’ का ‘आध्यात्मिक शोधकार्य और ज्योतिष’ इस विषय पर अपने विचार व्यक्त किए । इस कार्यक्रम के लिए विविध देशों के राजदूत, उच्चायुक्त, उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति, विविध विद्यापीठों के कुलगुरु, उप-कुलगुरु और विविध क्षेत्रों के तज्ञ और प्रसिद्ध ज्योतिषी उपस्थित रहे । इस परिषद में तामिलनाडू के सुप्रसिद्ध ‘सप्तर्षी जीवनाडीपट्टी’ के वाचक ॐ उलगनाथनजी की भी वंदनीय उपस्थिती प्राप्त हुई ।
इस परिषद में बोलते हुए पू. सिंगबाळजी से कहा कि, परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के मार्गदर्शनानुसार महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय द्वारा सनातन धर्म के विविध आचार, आहार, वेशभूषा, केशभूषा, संगीत, अक्षरयोग, तीर्थक्षेत्र, मंदिर, संत और साधना का व्यक्ति, वस्तु, वास्तु और वातावरण पर होनेवाले परिणामों का आध्यात्मिक दृष्टिकोन से, तथा वैज्ञानिक परिभाषा में अध्ययन किया जाता है ।
साथ ही ज्योतिषशास्त्र में भी विविधांगी अनुसंधान कार्य चल रहा है । इसके अंतर्गत अबतक देशभर में हुए ज्योतिष अधिवेशनों में १३ से अधिक ज्योतिषशास्त्र पर शोधप्रबंध प्रस्तुत किए गए हैं । जिन व्यक्तियों को अनिष्ट शक्तियों का कष्ट है और जिन्हें अनिष्ट शक्तियों का कष्ट नहीं है, ऐसी ३०० लोगों की कुंडलियां तथा संत और दैवी बालकों की भी कुंडली अनुसंधान हेतु संग्रहित की हैं ।
इनकी कुंडली में समान योगों का अध्ययन कर व्यक्ति को मोक्षप्राप्ति करने के लिए ज्योतिषशास्त्र के आधार पर सहायता और मार्गदर्शन कर सकें, इस व्यापक उद्देश्य से अनुसंधान करने हेतु हम प्रयासरत हैं । इस ईश्वरीय कार्य में ज्योतिषी सम्मिलित होकर अपना भी योगदान दें, ऐसा आवाहन भी सिंगबाळजी ने इस समय किया ।
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