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भिवंडी में 7 साल की बच्ची से बलात्कार और हत्या के आरोपी को फांसी की सज़ा

बलात्कार और हत्या के आरोपी को फांसी की सज़ा

कर्ण हिंदुस्तानी

भिवंडी – भिवंडी में सात वर्षीय स्कूली छात्रा का अपहरण कर आइसक्रीम का लालच देकर उसके साथ बलात्कार करने के बाद पत्थर मारकर हत्या कर दी गई थी।

२०१९ में घटित इस जघन्य घटना के बाद मात्र दस घंटे में पुलिस ने आरोपी भरतकुमार धनीराम कोरी (३० ) को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की थी। ।

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ठाणे की विशेष पोक्सो अदालत ने आरोपी को मौत की सजा सुनाई गई है। ठाणे जिले के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी पोक्सो अदालत ने किसी को मौत की सजा सुनाई है।

बता दें कि सात वर्षीय स्कूली छात्रा का शनिवार रात, 21 दिसंबर, 2019 को भरतकुमार द्वारा अपहरण किया गया और उसे आइसक्रीम का लांच देकर उसके साथ बलात्कार किया गया।

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छात्रा कहीं घर वालों को इस दुष्कर्म की जानकारी ना दे दे , इसलिए आरोपी ने छात्रा की हत्या कर शव झाड़ियों में फेंक दिया था।

अगले दिन रविवार 22 दिसंबर 2019 को सुबह करीब 6 बजे झाड़ी में शौचालय जाने वाले एक व्यक्ति को छात्रा का शव दिखा ।

उस व्यक्ति ने शोर मचाया और पुलिस को घटना के बारे में बताया। इसके बाद यह निंदनीय और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई.

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भिवंडी की पुलिस ने भोईवाड़ा थाने में विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी.और आरोपी कोरी को दस घंटे में गिरफ्तार कर लिया गया.

मामले की जांच के बाद पुलिस ने महज 15 दिनों में ठाणे जिला एवं सत्र विशेष पोक्सो अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी थी.

मृतक पीड़िता की ओर से करीब 25 गवाहों से पूछताछ की गई. सुनवाई के दौरान दो नाबालिग समेत करीब 25 गवाहों से पूछताछ की गई. .

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साथ ही आरोपी की डीएनए रिपोर्ट भी मैच हुई, जो मुख्य सबूत थी। लोक अभियोजक संजय मोरे ने कहा कि सभी पुख्ता सबूतों के आधार पर आरोपी को मौत की सजा सुनाई गई।

बता दें कि बलात्कार और हत्या का अपराध करने से पहले आरोपी भरतकुमार कोरी पर उत्तर प्रदेश के अपने गांव में हत्या के प्रयास का आरोप लग चुका था.

सभी गवाहों और सबूतों की जांच के बाद बुधवार (20 अप्रैल) को न्यायाधीश शिरभटे की विशेष पोक्सो अदालत ने भरतकुमार कोरी को इस अपराध के लिए मौत की सजा सुनाई।

पीड़िता के एक रिश्तेदार ने कहा, “पिछले तीन साल परिवार के लिए वास्तव में मुश्किल भरे रहे हैं, उन्हें न्याय की उम्मीद थी , न्याय मिला लेकिन मासूम लड़की को वापस नहीं लाया जा सका, चाहे कुछ भी हो।”

मामले की पूरी जांच वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक कल्याणराव करपे के निगरानी में हुई। इस मामले में पुलिस कांस्टेबल डी. ए तोतेवाड़, पुलिस कांस्टेबल वी. वी शेवाले ने समय-समय पर कोर्ट में सबूत और गवाह पेश किए.

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