कल्याण के तर्ज पर अब डोंबिवली के हिंदी भाषियों में आपसी मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। जिसे समाज के अनेक वरिष्ठ हिंदी भाषी अनुचित मान रहे हैं।
और समय रहते इन नेताओं को एक मंच पर लाकर सुलह करवाने की मांग कर रहे हैं उनके अनुसार यहां के उत्तर भारतीयों में आपसी फूट से समाज कमजोर होगा।
ज्ञात हो की हिंदी भाषियों में पिछले 31 वर्ष से सक्रिय यहां की हिंदी भाषा जनता परिषद संस्था अपने स्थापना के साथ ही होली मिलन समारोह का आयोजन करता आ रहा है।
इसी परिषद के कुछ असंतुष्ट सदस्यो ने इसी वर्ष उत्तर भारतीय समाज एकता मंच नामक नई संस्था का गठन किया है और ठीक होली के दिन ही होली स्नेह मिलन समारोह का आयोजन किया गया है। दोनो आयोजनों का समय एक ही है।
डोंबिवली के उत्तर भारतीय समाज में जहां इस आपसी उठा पटक पर लोग तरह-तरह की चर्चा कर रहे हैं वही पिसवली के वरिष्ठ हिंदी भाषी बबन चौबे ने दोनों गुटों में सुलह कराने की अनेक कोशिश की। लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।
उनके अनुसार ऐसे दोनों गुट में आपसी मतभेद से यहां के हिंदी भाषा समाज का ही नुकसान होगा। बबन चौबे के अनुसार कुछ ही दिनों में यहां के उत्तर भारतीयों की भी हालत कल्याण जैसी ही हो जाएगी
उनके अनुसार कल्याण के अनेक वरिष्ठ हिंदी भाषियों ने मिलकर उत्तर भारतीय समाज कल्याण परिषद नामक संस्था का गठन किया था और वहां समाज के खर्चों से उत्तर भारतीय भवन भी बनवाया था
लेकिन ऐसे ही आपसी मतभेद के कारण उत्तर भारतीय भवन का काम अधूरा ही रहा और आज कल्याण में समाज की एकजुटता ना के बराबर है।
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