महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव संपन्न हुए 1 हफ्ते से अधिक समय हो गया है लेकिन एक बात जो आम लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है वह यह है कि कांग्रेस ने इस बार अपने स्टार प्रचारक शत्रुघ्न सिन्हा, नवजोत सिंह सिद्धू और संजय निरुपम को जानबूझकर चुनाव प्रचार से दूर क्यों रखा.
इसी वर्ष मई में संपन्न लोकसभा चुनाव में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में प्रवेश करने वाले नवजोत सिंह सिद्धू, बिहार के पटना सिटी से लोकसभा सांसद रहे मशहूर फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा और पिछले सत्र में मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष रहे संजय निरुपम हरियाणा विधानसभा चुनाव के साथ ही महाराष्ट्र चुनाव से भी मे भी प्रचार में कहीं भी अपनी उपस्थिति नहीं दिखा पाए.
लोगों में यह चर्चा जोर-शोर से हो रही है कि आखिर क्या कारण थे कि कांग्रेस नेतृत्व ने इन स्टार प्रचारकों को इन दोनों राज्यों के चुनाव प्रचार नहीं उतारा ? कांग्रेसी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को इस बात का अंदाजा हो गया था सभी नेतागण दिखा तो रहे थे कि हम कांग्रेस के लिए प्रचार कर रहे है. लेकिन अपने प्रचार के दौरान ऐसी भाषाओं का प्रयोग कर रहे थे जिससे चुनाव में कांग्रेस के प्रति लोगों में दुर्भावना बढे.
गत लोकसभा चुनाव में फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने जहां जिन्ना का मुद्दा उठाकर देशभर के कांग्रेसी मतदाताओं में असमंजस की स्थिति पैदा कर दी थी वही सिद्धू ने नरेंद्र मोदी के लिए अभद्र भाषा का उपयोग किया था इसी तरह मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष रहे संजय निरुपम ने उस समय चल रहे कर्नाटक सरकार बनाने की उठापटक में राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद के लिए कुत्ता शब्द का उपयोग किया था
यह सब बातें कांग्रेस में रहकर कांग्रेसी ही कर रहा था जिससे देशभर में लोगों में कांग्रेस के प्रति और द्वेष बढ़ गया था और इसके अच्छे खासे दुष्परिणाम मतदान के दौरान होने की बात कांग्रेस नेतृत्व ने भी समझी है और लोकसभा चुनाव के बाद ही जहां एक तरफ मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम को अपने उनके पद से हटा दिया गया वहीं सिद्धू भी अपने पंजाब के मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे चुके हैं और शॉटगन शत्रुघ्न सिन्हा द्वारा लोकसभा चुनाव के बाद से शायद राजनीतिक जीवन ही छोड़ देने की अटकलें लग रही है
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